सोनभद्र

प्रकृति, पर्यावरण और समाज के प्रति संवेदनशील पर रखे ध्यान-शुभा प्रेम

दुद्धी(मदन मोहन तिवारी )सोमवार को भाऊराव देवरस राजकीय महाविद्यालय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम आयोजित की गई। । कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ राजेश भारती ने किया। मुख्य अतिथि वनवासी सेवा आश्रम की सचिव शुभा प्रेम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महाविद्यालय जीवन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, ज्ञान-विकास और भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन, समयपालन, खेलकूद एवं महाविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। प्राचार्य राजेश भारती ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था एवं नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। राजेश यादव ने कहा नियमित कक्षा उपस्थिति, समयपालन, अनुशासन, शिक्षकों के सम्मान, आंतरिक मूल्यांकन, असाइनमेंट, पुस्तकालय के उपयोग, प्रयोगशाला कार्य, महाविद्यालय की संपत्ति की सुरक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा रैगिंग से दूर रहने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों एवं पाठ्यक्रमों की जानकारी भी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को प्रदान की गई। अंकिता चंद्र ने वाणिज्य विभाग, राजेश कुमार यादव ने राजनीति विज्ञान विभाग, सचिन विश्वकर्मा ने वनस्पति विज्ञान विभाग, डॉ. मिथिलेश कुमार गौतम ने प्राणी विज्ञान विभाग, डॉ. प्रियंका ने अंग्रेजी विभाग तथा डॉ. मालती देवी ने हिंदी विभाग एवं संबंधित पाठ्यक्रमों की जानकारी विद्यार्थियों को दी। प्राणी विज्ञान विभाग के डॉ. मिथिलेश कुमार गौतम ने विद्यार्थियों को प्राणी विज्ञान विषय की व्यापकता एवं भविष्य में उपलब्ध करियर अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राणी विज्ञान के अध्ययन के बाद विद्यार्थी उच्च शिक्षा एवं शोध, अध्यापन, वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता, पर्यावरण अध्ययन, मत्स्य विज्ञान, कीट विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, आणविक जीव विज्ञान, फोरेंसिक विज्ञान तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से उज्ज्वल करियर बना सकते है। डॉ अंकिता चंद्र ने नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को विद्यार्थी जीवन, समय प्रबंधन, अध्ययन की नियमितता, लक्ष्य निर्धारण, सकारात्मक सोच, अनुशासन तथा महाविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। डॉ. मालती देवी ने हिंदी-संस्कृत भाषा एवं साहित्य के प्रति जो छात्राओं में भय एवं डर का माहौल है उसको दूर करते हुए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उसके महत्व के बारे में बताया डॉ. प्रियंका जायसवाल ने विद्यार्थियों को दीक्षा का अर्थ समझाते हुए उनके समग्र एवं व्यापक विकास पर जोर दिया जिससे वो राष्ट निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें कार्यक्रम की
मुख्य अतिथि बहन शुभा प्रेम, सचिव वनवासी सेवा आश्रम ने अपने संबोधन में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के ज्ञान, व्यक्तित्व, चरित्र और सामाजिक चेतना के विकास का महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं का विकास करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देना भी है। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज के कमजोर, वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर परिश्रम करें। सफलता के लिए अनुशासन, समय का सदुपयोग, ईमानदारी, धैर्य और सकारात्मक सोच आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल एवं सोशल मीडिया के अनावश्यक उपयोग से बचते हुए तकनीक का उपयोग ज्ञान एवं शिक्षा के लिए करने की सलाह दी। मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को प्रकृति, पर्यावरण और समाज के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने आसपास के सामाजिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों को समझें और उनके समाधान में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएँ। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण एवं वनवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा का उपयोग अपने समाज के विकास और जागरूकता के लिए करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने जीवन में “मैं” से “हम” की भावना विकसित करें, क्योंकि सामूहिक प्रयास से ही समाज और राष्ट्र का वास्तविक विकास संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों को मानवीय मूल्यों, सेवा भावना, सहयोग, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि महाविद्यालय में प्राप्त शिक्षा और संस्कार उनके भविष्य को दिशा प्रदान करेंगे। विद्यार्थियों को अपने माता-पिता, शिक्षकों और महाविद्यालय का नाम रोशन करने के साथ-साथ एक जिम्मेदार नागरिक बनने का प्रयास करना चाहिए।
मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के विकास, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में उसका उपयोग करें।कार्यक्रम में महाविद्यालय के सहयोगी कर्मचारियों का भी परिचय कराया गया। प्रयोगशाला सहायकों के रूप में उमेश, श्री अजय, श्यामा एवं मृत्युंजय, प्रयोगशाला परिचरों के रूप में श्री संतोष कुमार सिंह, नंद बिहारी कुशवाहा, मोहम्मद शाहबाज खान एवं सुरेश चंद्र तथा कार्यालय कर्मचारियों के रूप में अंगद प्रसाद, मनोज कुमार शर्मा, वेदव्यास पांडे, रितिक कुमार एवं नीरज कुमार रावत का परिचय नवप्रवेशित विद्यार्थियों से कराया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, विभिन्न विभागों, पाठ्यक्रमों, नियमों, सुविधाओं, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तथा भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराना था।कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकगण, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। दीक्षारंभ कार्यक्रम ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की नई यात्रा के लिए प्रेरणा, दिशा और उत्साह प्रदान किया।

Ram Ashish Yadav

राम आशीष यादव सोनभद्र विंडमगज निवासी है। कुछ कर गुजरने की ललक के कारण कम समय मे ही राम आशीष यादव आज जिले की पत्रकारिता मे एक जाना पहचाना नाम है।

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