विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए शुरू हुआ मिट्टी का परीक्षण

रनटोला जंगल और गांव में शुरू हुई जांच, 30 से 50 मीटर गहराई तक लिए जा रहे मिट्टी के नमूने
म्योरपुर/सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण की तैयारियों ने अब रफ्तार पकड़ ली है। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के निर्माण से पहले जमीन की मजबूती और मिट्टी की परतों की स्थिति का पता लगाने के लिए म्योरपुर ब्लॉक क्षेत्र में मुर्धवा-बीजपुर मार्ग स्थित रनटोला जंगल और गांव में मिट्टी का परीक्षण शुरू कर दिया गया है। शुक्रवार को निर्धारित स्थानों पर तकनीकी टीम ने ड्रिलिंग कर मिट्टी के नमूने लिए। नमूनों को विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
मिट्टी की जांच कर रही अरुण सॉयल लैब प्राइवेट लिमिटेड के साइट इंचार्ज विकास कुमार ने बताया कि एक्सप्रेसवे जैसे बड़े निर्माण के लिए जमीन के नीचे की संरचना और उसकी भार सहने की क्षमता का पता लगाना बेहद जरूरी है। इसी के तहत अलग-अलग स्थानों पर निर्धारित गहराई तक मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं। समतल भूमि वाले क्षेत्रों में करीब 30 मीटर तक तथा नदी-नाले वाले क्षेत्रों में डीपीआर के अनुसार करीब 50 मीटर तक गहराई से नमूने लिए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान जमीन के नीचे मौजूद मिट्टी की विभिन्न परतों की स्थिति का पता लगाया जाएगा। ऊपरी मिट्टी के बाद बालू, मोरम, कंकड़-पत्थर और चट्टान की स्थिति की जांच की जाएगी। इसके साथ ही जमीन की भार वहन क्षमता का भी परीक्षण होगा। इससे यह पता चलेगा कि भारी वाहनों के लगातार आवागमन के दौरान सड़क की नींव पर कितना भार पड़ेगा और जमीन के धंसने या बैठने की आशंका कितनी है।
मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर एक्सप्रेसवे के फाउंडेशन और सड़क निर्माण की तकनीकी मजबूती निर्धारित करने में मदद मिलेगी। खासकर रनटोला और मुर्धवा के जंगल क्षेत्र में प्रस्तावित मार्ग के कारण यहां की भौगोलिक और भूगर्भीय स्थिति का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के मार्ग को लेकर सर्वेक्षण का कार्य किया जा चुका है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार एक्सप्रेसवे का अंतिम हिस्सा सोनभद्र के वन क्षेत्र से होकर गुजरेगा।
प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज से सोनभद्र के बभनी क्षेत्र के परसा टोला तक करीब 330 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। परियोजना को उत्तर प्रदेश कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। इसके बनने से प्रयागराज, विंध्य क्षेत्र और सोनभद्र के बीच आवागमन बेहतर होने के साथ ही दक्षिणी और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है।
सोनभद्र में एक्सप्रेसवे की जद में कुल 108 गांव आने की जानकारी प्रशासनिक स्तर पर सामने आई है। जुलाई में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए परियोजना से प्रभावित गांवों के राजस्व अभिलेखों का सत्यापन और किसानवार विवरण तैयार करने के निर्देश दिए थे। रॉबर्ट्सगंज तहसील के 54 गांवों के अभिलेखों की विशेष रूप से जांच की जा रही है।
प्रशासन की ओर से प्रत्येक प्रभावित गांव में खाता संख्या, खातेदार का नाम, सहखातेदार, भूमि में हिस्सेदारी, भूमि की स्थिति तथा ग्राम सभा और अन्य सरकारी भूमि का अलग-अलग विवरण तैयार किया जा रहा है। इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इधर रनटोला क्षेत्र में मिट्टी परीक्षण शुरू होने से स्थानीय स्तर पर भी एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर हलचल बढ़ गई है। मिट्टी की जांच, सर्वे और भूमि संबंधी अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना के अगले चरण की तैयारियां आगे बढ़ेंगी। ऐसे में रनटोला जंगल में शुरू हुआ मिट्टी परीक्षण एक्सप्रेसवे निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण तकनीकी कदम माना जा रहा है।


