सोनभद्र

आंगनबाड़ी कर्मियों ने प्रोत्साहन राशि का भुगतान नियमित करने की उठाई मांग

सोनभद्र (विकास द्विवेदी) आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश की जिला शाखा सोनभद्र ने प्रदेश सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हित में की गई घोषणाओं का स्वागत करते हुए प्रोत्साहन राशि के भुगतान की व्यवस्था पर सवाल उठाया है। संघ ने कहा कि प्रोत्साहन राशि के नाम पर कार्यकर्ताओं को नियमित भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने मांग की है कि प्रोत्साहन राशि को बंद कर उसे मूल मानदेय में शामिल किया जाए, ताकि हर माह नियमित भुगतान हो सके।
जिलाध्यक्ष प्रतिमा सिंह ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा, यूनिफॉर्म के लिए 500 रुपये की बढ़ोतरी तथा मानदेय को चार हजार रुपये से बढ़ाने जैसे निर्णय स्वागत योग्य हैं। उन्होंने इसके लिए सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान घोषणा में 1,500 रुपये मूल मानदेय तथा 2,500 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में बढ़ाए गए हैं। संघ की मांग है कि 2,500 रुपये की प्रोत्साहन राशि को भी मूल मानदेय में शामिल किया जाए, जिससे यह राशि प्रत्येक माह निश्चित रूप से मिल सके। जिलाध्यक्ष ने कहा कि पूर्व से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी सभी जनपदों में नियमित नहीं हो पा रहा है। कई जगहों पर अभी तक भुगतान नहीं हुआ है, जबकि जहां भुगतान हुआ है, वहां भी कई-कई महीनों की राशि बकाया है। कहीं एक-दो महीने की राशि छह महीने बाद मिलती है तो कहीं सालभर बाद भुगतान होता है। बहुत कम कार्यकर्ताओं को इसका लाभ मिल पाता है और उन्हें भी पूरी राशि नियमित रूप से नहीं मिलती।संघ ने पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से केंद्र खोलने और संचालित करने के लिए लागू जीपीएस व्यवस्था को भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए कठिन बताया। कहा कि गांवों में अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती है। कई कार्यकर्ताओं के पास आर्थिक परेशानी के कारण मोबाइल रिचार्ज कराने तक की स्थिति नहीं रहती। ऐसे में जीपीएस के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना हमेशा संभव नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विभागीय बैठकों, प्रशिक्षण, रैली, परियोजना कार्यालय तथा अन्य सरकारी कार्यों के लिए भी केंद्र से बाहर जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में जीपीएस के कारण केंद्र पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जबकि कार्यकर्ता विभागीय कार्य से बाहर होती हैं। परिणामस्वरूप केंद्र खुला होने के बावजूद उपस्थिति दर्ज न होने की समस्या सामने आती है। संघ का कहना है कि प्रोत्साहन राशि का भुगतान कार्य की स्थिति से जोड़ने के बजाय नियमित मानदेय के रूप में किया जाना चाहिए। प्रोत्साहन राशि के नाम पर भुगतान में अनियमितता की व्यवस्था भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, इसलिए इसे समाप्त कर पूरी राशि मूल मानदेय में शामिल की जाए। इस मौके पर साधना विश्वकर्मा, सीमा, रेखा, शकुंतला, ममता पाठक, दीप्ती, सोनम, गीता, इंदु, रेखा, संतरा, ममता, शशि किरण, प्रियंका, जानकी, इंद्रवती आदि रही।

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