सरकारी हैंडपम्प उखाड़कर बोरवेल से सिंचाई असनहर गांव में पेयजल संकट गहराया बूंद बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण

बभनी/सोनभद्र (अजित पांडेय) चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच बभनी ब्लॉक के ग्राम पंचायत असनहर में उच्च प्राथमिक विद्यालय के आगे रमेश गुप्ता के घर के पास पेयजल की स्थिति बेहद विकराल हो गई है। यहाँ सरकारी नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए कुछ दबंगों द्वारा सार्वजनिक हैंडपम्प को उखाड़कर, बोरवेल के जरिए फसलों की सिंचाई करने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस मनमानी के कारण पूरा गुप्ता टोला आज पानी की एक एक बूंद के लिए तरस रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक इस क्षेत्र में पानी की किल्लत नई नहीं है। पूर्व में भी पानी की भारी किल्लत को देखते हुए ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए यहाँ हैंडपम्प लगवाया था। लेकिन क्षेत्र के कुछ मनबढ़ तत्वों ने अपनी निजी स्वार्थ के लिए सरकारी हैंडपम्प को ही उखाड़ फेंका और वहाँ समरसेबल डाल दिया।
ग्रामीण केशलाल, कमलेश गुप्ता, गुलाब गुप्ता ने दर्द बया करते हुए बताया की एक तरफ जलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे वैसे ही नल सूख रहे हैं। ऊपर से जब एक ही जगह समरसेबल और हैंडपम्प दोनों का खेल चलेगा, और लगातार समरसेबल से सिंचाई होगी, तो आम जनता को पीने का पानी कहाँ से मिलेगा। सिस्टम की अनदेखी का खामियाजा हम गरीब भुगत रहे है।
गिरता भूगर्भ जलस्तर के कारण गर्मी के मौसम में वैसे ही वाटर लेवल काफी नीचे चला जाता है सार्वजनिक उपयोग के लिए लगे हैंडपम्प के स्रोत का इस्तेमाल निजी सिंचाई के लिए करना अवैध है।
साथ ही समरसेबल चलने के कारण आसपास के अन्य चापाकलो ने भी पानी छोड़ दिया है जिससे तपती धूप में ग्रामीण मीलों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।जब इस पूरे मामले को लेकर खंड विकास अधिकारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया और आश्वासन देते हुए कहा मामला संज्ञान में आया है। तत्काल ADO (पंचायत) को निर्देशित कर दिया गया है। टीम मौके पर जाकर जांच करेगी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा ग्रामीणों के हक का पानी रोकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पेयजल व्यवस्था को तुरंत बहाल कराया जाएगा।अब देखना यह है कि प्रशासन कागजी आश्वासनों से आगे बढ़कर इन मनबढ़ों पर कब तक शिकंजा कसता है और असनहर के ग्रामीणों को इस तपती गर्मी में पानी की इस विकराल समस्या से कब तक निजात मिलती है।



