सोनभद्र

प्रसव के दौरान महिला की मौत परिजनों का हंगामा अस्पताल सीज जाच के आदेश

कोन /सोनभद्र (आनन्द जायसवाल) कोन थाना क्षेत्र के निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत के बाद हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कारवाई का मांग किया।
मृतका की पहचान सीमा देवी (35 वर्ष) पत्नी देवनारायण, निवासी ग्राम सिंगा बागेसोती के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार प्रसव पीड़ा होने पर उन्हे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कचनरवा ले जाया गया, जहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे। वहा पर तैनात एएनएम किरण पटेल ने अपने यह 4 घंटा रखने के बाद ।108 एम्बुलेंस की सहायता से उन्हें कोन स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर भेजा गया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया गया। नवजात शिशु सुरक्षित जन्मा, लेकिन बाद में महिला की हालत बिगड़ गई और उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया तथा उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया।
सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर में। कोन थाना प्रभारी निरीक्षक अखिलेश मिश्रा ने भारी संख्या पुलिस बल तैनात किया गया। परिजनों ने वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने और कार्रवाई का आश्वासन मिलने तक शव ले जाने से इनकार कर दिया।
मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी ओबरा विवेक कुमार सिंह तथा डिप्टी सीएमओ जी पी यादव ने मामले की जांच के आदेश दिए।
डिप्टी सीएमओ ने बताया कि संबंधित अस्पताल को 20 मार्च को सील किया गया था, इसके बावजूद वहां संचालन जारी था। इस जानकारी के बाद प्रशासन ने अस्पताल को पुनः सीज कर दिया तथा उसके दस्तावेजों और संचालन संबंधी मामलों की जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल

इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या निजी अस्पतालों की नियमित जांच होती है। क्या आपरेशन करने वाले डाक्टरो की योग्यता और अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का सत्यापन किया जाता है? यदि अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नही थी तो वहा आपरेशन की अनुमति कैसे दी गई।
स्थानीय लोगो का कहना है कि जनपद मे कई निजी अस्पताल नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं और जिम्मेदार विभाग केवल कागजी कारवाई तक सीमित है। नतीजा यह है कि गरीब और ग्रामीण परिवार इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुचते है लेकिन कई बार उन्हे अपनी जान गवानी पड़ती है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। परिजनों ने दोषी डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं इस घटना के बाद एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

पहले भी विवादों में रहा अस्पताल

ग्रामीणों का आरोप है कि यह वही अस्पताल है जहा पूर्व मे भी कथित चिकित्सीय लापरवाही के चलते एक युवक की मौत हुई थी और कारवाई के बाद अस्पताल को सील किया गया था। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन जारी रहना कई सवाल खड़े कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि यदि अस्पताल पर पहले कारवाई हो चुकी थी तो आखिर वह दोबारा कैसे संचालित हो रहा था और वहा आपरेशन जैसी गंभीर चिकित्सा सेवाएं किस अनुमति से दी जा रही थी।

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