भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी आंगनवाड़ी भर्ती,जाँच मे सत्यता के बाद भी दर दर भटकने को मजबूर है पीड़िता ।
सोनभद्र में आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया में सलखन से उठा जांच का मामला पहुंचा कोर्ट अब बारी असनहर की ।
पीड़िता ने जिलाधिकारी दरबार में लगाई न्याय की गुहार।
छतीसगढ़ की बहु को रातों रात बना दिया गाँव का निवासी।
जाँच मे सच आया सामने, फिर भी फाइलो मे कैद है इंसाफ।
बभनी (अजीत पांडेय)
उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक तरफ जीरो टॉलरेंस नीति और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं सोनभद्र के जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय और स्थानीय तहसील प्रशासन की जुगलबंदी ने इन दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। जिले के असनहर गाँव में आंगनवाड़ी पद पर भर्ती के नाम पर जो धांधली का खेल खेला गया, उसने व्यवस्था के चेहरे से नकाब हटा दिया है। एक पात्र महिला न्याय पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
पूरा मामला असनहर प्रथम केंद्र के रिक्त पद से जुड़ा है। गाँव की मूल और पात्र निवासी बबिता गुप्ता ने इस पद के लिए नियमानुसार आवेदन किया था। लेकिन आरोपों के मुताबिक, गाँव के प्रधान ने अपने पद और रसूख का खुला दुरुपयोग करते हुए अपनी पुत्री सुनीता (जिसकी शादी कुछ वर्ष पहले छत्तीसगढ़ में हो चुकी है) को लाभ पहुँचाने के लिए स्थानीय लेखपाल से साठगांठ की और एक फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी करवा दिया। सभी नियमों को ताक पर रखकर, इस बाहरी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता सूची में शामिल भी कर लिया गया।
जब पीड़िता बबिता गुप्ता को इस धांधली की भनक लगी, तो उन्होंने हिम्मत दिखाकर साक्ष्य जुटाए। बबिता ने विपक्षी सुनीता का शादी का कार्ड, ग्राम प्रतिनिधियों के बयान और छत्तीसगढ़ में उसके दो बच्चों के होने के पुख्ता प्रमाण जुटाकर DPO सोनभद्र के सामने पेश किए।तो डीपीओ ने न्याय देने के बजाय पीड़िता को तहसील का रास्ता दिखाकर टालते रहे। हद तो तब हो गई जब इस भ्रष्ट तंत्र ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उल्टा पीड़िता का ही आय प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया, ताकि उसकी पात्रता ही खत्म हो जाए और वह कानूनी रेस से बाहर हो जाए।मामला ज़ब आखिरकार जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुँचा, तो उनके निर्देश पर एक जांच टीम गठित की गई। नायब तहसीलदार जितेंद्र कुमार की टीम ने मौके पर जाकर जांच की तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
जांच रिपोर्ट (संख्या: 845/45) में स्पष्ट पाया गया कि सुनीता की शादी 4 साल पहले छत्तीसगढ़ में हो चुकी है।वह असनहर गाँव की निवासी नहीं है और उसका निवास प्रमाण पत्र पूरी तरह अवैध है।हैरानी की बात यह है कि इतनी स्पष्ट रिपोर्ट आने के बावजूद, भ्रष्ट अधिकारियों ने इसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के बजाय ऑफलाइन के चक्कर में फंसा दिया। पीड़िता का कहना है कि प्रशासन ने दोनों पक्षों को अधर में लटका कर छोड़ दिया है।
जब पीड़िता बबिता गुप्ता अपनी सत्यता की जांच रिपोर्ट लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी के पास पहुँची, तो वहां न्याय के बदले एक नया पैंतरा तैयार मिला। सूत्रों और पीड़िता के आरोपों के अनुसार, जब अधिकारियों की भारी लेनदेन की मंशा पूरी नहीं हो सकी, तो DPO ने इस पूरी भर्ती को ही ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी कर ली है। अब तर्क दिया जा रहा है कि यह भर्ती नए सिरे से होगी।इसकी शिकायत पीड़िता ने जिलाधिकारी से करते हुए न्याय की मांग की है।
गंभीर सवाल जो जवाब मांगते हैं:
जब बबिता गुप्ता ने अपनी पात्रता और सत्यता पूरी तरह सिद्ध कर दी है, तो उन्हें नियुक्ति पत्र देने के बजाय प्रक्रिया को रद्द क्यों किया जा रहा है?
फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले लेखपाल और अपनों को रेवड़ी बांटने वाले ग्राम प्रधान पर अब तक जालसाजी का मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ?
क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पारदर्शी उत्तर प्रदेश के सपने को सोनभद्र के अधिकारी ऐसे ही पलीता लगाते रहेंगे?इस बाबत जब जिला कार्यक्रम अधिकारी से जरिए दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उनके द्वारा फोन पर गोलमाल जबाव दिया गया और जब इस बाबत सीडीपीओ बभनी से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि हमारे जांच स्तर में नहीं है और आगे उन्होंने बताया कि 90 दिनों के अंदर जांच प्रक्रिया पूरी हो गई होती तो नियुक्ति पुरानी फाइल से ही होती लेकिन 90 दिनों पूरे होने के बाद यह नियुक्ति नए सिरे से होगी सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि जब पूरी भर्ती प्रक्रिया 90 दिनों में पूर्ण करनी है तो किस कारण यह मामला लंबित रखा गया और अभ्यर्थी को क्यों गुमराह किया गया कही न कही इस मामले में भ्रष्टाचार की बू आ रही है यह मामला नियोक्ता डीपीओ के स्तर का है वो ही निर्णय लेंगे कि भर्ती प्रक्रिया कैसे होगी ।



