सोनभद्र

रोजगार का सवाल हल करेंगी जन राजनीति – आईपीएफ

एजेंडा यू. पी. को लेकर आईपीएफ ने की बैठक

म्योरपुर, सोनभद्र। दुध्दी के इस आदिवासी बाहुल्य अति पिछड़े इलाके में यदि खेती किसानी विकसित करने के लिए कनहर सिंचाई परियोजना को पूरा किया जाता, जैविक अरहर की खेती को प्रोत्साहन दिया जाता, मनरेगा में सालभर काम व 600 रूपए मजदूरी और जंगल की जमीनों पर फलदार वृक्ष लगाने के लिए आदिवासियों व ग्रामीणों की सहकारी समितियां को दिया जाता, वनाधिकार कानून के तहत जमीन पर पट्टे मिलते, नदियों में हो रहे खनन कार्य को स्थानीय निवासियों की कोऑपरेटिव के जरिए कराया जाता, उद्योगों में स्थानीय निवासियों को 50% नौकरी की गारंटी की जाती तो इस क्षेत्र से पलायन को रोका जा सकता था और बड़े पैमाने पर लोगों के सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित किया जा सकता था। यह काम कॉर्पोरेट परस्त राजनीति करने वाले दलों के बूते संभव नहीं है इसे जन राजनीति ही हल कर सकती हैं। दरअसल मौजूदा गम्भीर रोजगार संकट कॉर्पोरेट घरानों को मुनाफा दिलाने वाली नीतियों के कारण ही पैदा हुआ है जिसमें कल्याणकारी राज्य के तौर पर दिए जाने वाले रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि विकास आदि महत्वपूर्ण क्षेत्रों से सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए है। इसलिए इस इलाके में जन राजनीति को मजबूत करना होगा। यह बातें एजेंडा यू. पी. अभियान के तहत विभिन्न गांवों में आयोजित बैठकों में ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर ने कहीं। दुध्दी के काचन, करहिया, किरबिल, नवाटोला, बलियारी, गडदरवा, बीडर, दुम्हान, रनटोला, डडियरा आदि गांव में बैठकें आयोजित की गई।
उन्होंने कहा कि इस इलाके में नदी, जंगल, पहाड़ और सार्वजनिक संपदा की लूट मची हुई है। इस इलाके में विकास कार्यों में जो पैसा आ रहा है वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जा रहा है। न्यायालय के आदेश के बावजूद बालू खनन में भारी मशीन लगाई जा रही हैं जिससे पर्यावरण का संकट तो हो ही रहा है इसमें लगे हजारों मजदूरों को रोजगार से भी बेदखल कर दिया गया है। परिणामतह रोजगार के अभाव में बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। वन अधिकार कानून के तहत जमीन देने के सवाल पर हमने हाईकोर्ट से लड़कर आदेश कराया। जिसके बाद सरकार ने जमीन देने का वादा किया। खुद मुख्यमंत्री महोदय बभनी आए और घोषणा की कि वनाधिकार में जमीन का आवंटन होगा, लेकिन इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। चुनाव में जमीन व रोजगार प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनेंगे और इस पर जनता की गोलबंदी की जाएगी।
बैठकों में मजदूर किसान मंच के संयोजक रामचंद्र पटेल, पूर्व प्रधान बलवीर सिंह गोड़, राम विचार गोंड, महावीर गोंड, अवध नारायण सिंह, दया किशुन कुशवाहा, विश्राम सागर पटेल, सीताराम पटेल, रामदुलारे गोंड, हरिवंश गोंड, राम लखन गोंड, जगदीश गोंड, शिव शंकर गोंड, बंसलाल गोंड, रामदेव गोंड आदि लोगों ने बात रखी।

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