जल जंगल और जमीन जीवन रक्षा की है स्कीम – संदीप मिश्रा

सोनभद्र तरिया क्षेत्र में अपने पारिवारिक जनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार ससनयी स्थित डीह बाबा स्थल पर एकत्र हुए। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी जमीन, जंगल और पूर्वजों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कथित तौर पर पीएसपी कंपनी और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
कार्यक्रम में संदीप मिश्रा ने आरोप लगाया कि फर्जी तरीके से हस्ताक्षर और मोहर कराकर पूर्वजों के वंशजों के हक एवं अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। कहा कि यदि किसी भी परिवार के घर या जमीन पर कार्रवाई का प्रयास किया गया तो उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
इस अवसर पर पेड़ हैं तो प्राण हैं अभियान के जिला संयोजक रामसूरत खरवार ने कहा कि जंगल और पर्यावरण केवल प्राकृतिक संपदा नहीं बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और आजीविका का आधार है। उन्होंने कहा कि एक ओर जनहित याचिका में प्रमुख सचिव के हलफनामे में सोनभद्र में कोई कार्य न होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रीनको कंपनी को लगभग दो लाख पांच हजार पेड़ काटने की अनुमति दिए जाने की चर्चा सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि यदि यह तथ्य सही हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
रामसूरत खरवार ने आरोप लगाया कि जिस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ कटान की बात कही जा रही है, वहां वर्षों से वन विभाग द्वारा करोड़ों पौधे लगाए जाने का दावा किया जाता रहा है। ऐसे में उन पौधों का वास्तविक रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि वन विभाग और संबंधित एजेंसियों को पूरे मामले में पारदर्शिता बरतनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे।
सभा में मौजूद वक्ताओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा आदिवासी परिवारों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
कार्यक्रम में बासमती गोंड़, गुलाबी चेरो, रामसूरत खरवार, कन्हैया चेरो, जोगेंद्र यादव, दिनेश चेरो, विंदू खरवार, आकाश चौहान, मुखलाल चेरो, गुलाब चेरो सहित सैकड़ों आदिवासी परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे।



