प्रसव के दौरान बच्चा की मौत, बवाल के डर से जच्चा की दूसरे दिन छुट्टी
मामला दुद्धी कस्बे के एक निजी अस्पताल का
दुद्धी, सोनभद्र। जच्चा-बच्चा मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार द्वारा जननी सुरक्षा योजना से लेकर प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना जैसी योजनाओं को नगर के निजी अस्पताल वाले किस तरह पलीता लगा रहे हैं इसका प्रमाण दुद्धी में देखा जा सकता है। क्षेत्र के भोलेभाले अशिक्षित लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनका शोषण इस हद तक किया जाता है कि धन-दौलत के साथ-साथ जान भी गवानी पड़ती है। नगर के बढनीनाला कब्रिस्तान के सामने स्थित एक निजी अस्पताल में मंगलवार की रात से शुरू एक मरीज का शोषण वृहस्पतिवार की दोपहर तक चला। इन दो दिनों में आर्थिक मार के साथ उसे अपने नवजात शिशु की जान तक गंवानी पड़ी। बभनी थाना क्षेत्र के मनरुटोला सांगोबान्ध निवासी गणेश यादव की पत्नी गीता देवी को प्रसव पीड़ा की शिकायत पर क्षेत्रीय आशा कार्यकत्री द्वारा दुद्धी लाया गया। रात में सरकारी अस्पताल में कोई डॉक्टर न होने जैसी बात का गुमराह कर आशा द्वारा नगर के बढनीनाला स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती करा दिया गया। अस्पताल में नार्मल डिलीवरी कराने की बात कह भर्ती कर लिया गया। रात में सीरियस होने का ख़ौफ़ दिखा गढ़वा से सर्जन बुलाने की बात बता 7 हजार रुपया जमा कर लिया गया। परीशान हाल मरीज के परिजन किसी तरह जच्चा-बच्चा को बचाने की गुहार लगाई गई। रात में बिना किसी आपरेशन के नार्मल डिलीवरी करा बच्चे की मौत होने की सूचना परिजनों को दी गई। जच्चा को भी सीरियस बता और पैसा इंतजाम करने की बात कह भर्ती रखा गया। सुबह मरीज के एक रिश्तेदार को इसकी जानकारी हुई तो डीएम व सीएमओ सोनभद्र को ट्वीट कर मामले की जानकारी देते हुए तत्काल कार्यवाई की मांग की गई। वृहस्पतिवार को इसकी जानकारी होते ही अस्पताल द्वारा उससे बिना कोई पैसा लिए डिस्चार्ज कर दिया गया। अपने आपको डाइरेक्टर बताने वाले अशोक कुमार ने बताया कि महिला का सीजेरियन के जरिये बच्चा पैदा कराया गया था। सीजेरियन केस को मात्र एक दिन बाद ही डिस्चार्ज करने का खबर मिलने पर जब दुबारा अशोक कुमार से संपर्क किया गया तो अपने पूर्व के बयान से मुकरते हुए बताया कि महिला का नार्मल डिलीवरी हुआ था। बहरहाल अज्ञानता के कारण जनपद के पिछड़े आदिवासी क्षेत्र में शुमार भोले भाले ग्रामीणों का शोषण कब तक बड़े-बड़े नर्सिंग होम एवम सर्जिकल सेंटर का बोर्ड लगाकर करते रहेंगे यक विकसित समाज के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है। बिना चिकित्सक के मरीजों का शोषण करने वाले निजी अस्पताल के झोलाछापों पर सरकारी मुलाजिमों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
इस बावत सीएचसी अधीक्षक डॉ शाह आलम अंसारी ने बताया कि जिला मुख्यालय पर आयोजित आशा सम्मेलन से लौट रहा हूँ। एक ओर आज सम्मेलन में आशाओं को सम्मानित किया जा रहा था वहीं दूसरी तरफ दुद्धी में आशा कार्यकत्री की यह हरकत से हतप्रभ हुँ। उसके कार्यप्रणाली की जांच कर विभागीय कार्यवाई अमल में लाई जाएगी। दूसरी ओर केयर हॉस्पिटल को पहले ही सीज किया जा चुका है फिर दुबारा ये कैसे खुल गया इसकी जांच के लिए नोडल अधिकारी को अवगत कराया जाएगा।



