रोजगार की गारंटी के लिए बने कानून-संयुक्त युवा मोर्चा
संयुक्त युवा मोर्चा की लखनऊ में मीटिंग 19 अगस्त को सोनभद्र से युवा प्रतिनिधि मीटिंग में होंगे शामिल
सोनभद्र।
गरिमामय रोजगार गारंटी सुनिश्चित करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। संविधान के अनुच्छेद 41 में इसका स्पष्ट उल्लेख है। आज देश में अभूतपूर्व आजीविका संकट है इसलिए रोजगार अधिकार की गारंटी के लिए कानून बनाना और रोजगार के सवाल को हल करना बेहद जरूरी है। अनुच्छेद 39 में संसाधनों पर नागरिकों के हक के लिए संवैधानिक प्रावधान है। उक्त बातें सोनभद्र के युवाओं से वर्चुअल संवाद करते हुए संयुक्त युवा मोर्चा के केंद्रीय टीम के सदस्य व युवा मंच के प्रदेश संयोजक राजेश सचान ने कहीं। आगे कहा कि प्रदेश में रिकॉर्ड रोजगार सृजन व सरकारी नौकरी मुहैया कराने का जोरशोर से प्रोपैगैंडा हो रहा है। विधानसभा के सत्र में मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हाल में आयोजित ग्लोबल सबमिट से एक करोड़ रोजगार का सृजन होगा। जबकि पहले हुई इसी तरह की बहुप्रचारित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का हश्र देखा जा चुका है। स्थिति यह है कि बैंकों में नागरिकों का जो धन जमा है उसका भी महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों में पलायन हो रहा है। मौजूदा समय में प्रदेश में 6 लाख पद रिक्त पड़े हैं लेकिन सरकार इन्हें भरने के लिए तैयार नहीं है। वहीं परिषदीय विद्यालयों में हाल में ही 1.39 लाख पदों को खत्म कर दिया गया। अन्य विभागों में भी पदों को खत्म किया जा रहा है। बताया कि 19 अगस्त को लखनऊ में आयोजित बैठक में सोनभद्र से भी युवा प्रतिनिधि शामिल होंगे।
सोनभद्र में संयुक्त युवा मोर्चा देशव्यापी आवाहन के तहत रोजगार अधिकार अभियान अनवरत जारी है। इसी क्रम में म्योरपुर के रासपहरी में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। युवा संवाद में वक्ताओं ने कहा कि आज आजीविका के गहराते संकट से सोनभद्र जैसे पिछड़े जनपद में हालात बेहद गंभीर हैं। यहां युवाओं का तो भारी पलायन है ही बल्कि इधर आदिवासी-दलित व गरीब पृष्ठभूमि की लड़कियां भी रोजीरोटी की तलाश में पलायन करने के लिए मजबूर हैं। सोनभद्र में बैंकों में नागरिकों की जमा पूंजी का भी पलायन हो रहा है, अगर यह पूंजी यहां नौजवानों को उद्यम के लिए प्रदान की जाती, उपयुक्त तकनीक व उत्पाद के खरीद की गारंटी होती, उदाहरण के लिए टमाटर प्रसंस्करण जैसे कृषि आधारित उद्योगों का विकास किया जाता तो पर्याप्त रोजगार सृजन के साथ ही जनपद का विकास भी सुनिश्चित होता। लेकिन उपेक्षा का आलम यह है कि बार-बार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के बावजूद आदिवासी व गरीब पृष्ठभूमि की छात्राओं के लिए आवासीय महिला महाविद्यालय, नर्सिंग व कंप्यूटर प्रशिक्षण जैसे सामान्य मांगों को हल करने के लिए सरकार तैयार नहीं है। युवा संवाद में युवा मंच की जिला अध्यक्ष रूबी सिंह गोंड, संयुक्त युवा मोर्चा की सविता गोंड, गुंजा गोंड, सुगवंती गोंड, राजकुमारी गोंड, हरिनाथ खरवार, आलोक गोंड गंगाधर दुबे, दीपक पटेल समेत काफी संख्या में युवा मौजूद रहे।



