मुहर्रम का दिखा चाँद, इस्लामी नया साल शुरू
दारुल उलूम कादरिया नूरिया मदरसा ने की तस्दीक
नौ व दस को रोजा तथा दसवीं की रात इबादत की-नसीरे मिल्लत
दुद्धी,सोनभद्र। हर साल मुहर्रमुल हराम का महीना इस्लामी दुनिया को नए साल के आमद की पैगाम देता है। बुधवार को चाँद दिखने की दशा में नया इस्लामी साल शुरू हो गया। चाँद की तस्दीक दारुल उलूम कादरिया नूरिया मदरसा से हुई। यह इस्लामी तारीख का एक बड़ा अहम महीना है, और इस महीने की दसवीं तारीख जिसे यौमे आशूरा के नाम से जाना जाता है यह दिन अपने दामन में तारीख के अहम वाक़ियात समेटे हुए है। हजरत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाइश से लेकर कयामत कायम होने तक बड़े-बड़े तारीख साज वाक़ियात इस दिन से मंसूब है। इस्लामी तारीख में आशूरा का दिन हजरत इमाम हुसैन शहीदे कर्बला की बेमिसाल शहादत की बदौलत कुछ और ही अंदाज में यादगारी बन गया। खिलाफते राओदा के खत्म होने के बाद इफ्तेदार (सत्ता) की हवस में जब दुनियादारों ने इस्लामी उसूलों को नजरअंदाज करते हुए हुकूमत कायम करनी चाहे तो हक के अलमबरदार नवासा ए रसूल इमाम हुसैन ने इसकी जबरदस्त मुखालिफत फरमाई। तख्ते शाही की तलब और हवस ने यजीद को इतना अंधा व पागल बना दिया कि वह अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आया। हजरत इमाम हुसैन ने अपने घर वालों के साथ कर्बला के मैदान में हक व इस्लाम के लिए जो शहादत पेश फरमाई वह आने वाली नस्लों के लिए जिंदा जावेद पैगाम है।
कादरिया तालीमी ग्रुप के संस्थापक हजरत नसीरे मिल्लत कहते हैं कि अल्लाह के रसूल के फरमान की रोशनी में हमें नौ व दस तारीख को रोजा रखने व दसवीं की रात इबादत में गुजारना चाहिए। शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश करने के लिए कुरानख्वानी का एहतमाम करें। उनकी शहादत से सबक हासिल करते हुए शरीयत की पाबंदी करने और वक्त आने पर इस्लाम के लिए अपना तन-मन-धन कुर्बान करने का जज्बा पैदा करें।
मख्तब जब्बरिया के पूर्व प्रबंधक फतेहमुहम्मद खान, कलीमुल्लाह खान, एजाजुल हुदा, वरिष्ठ उस्ताद जलील साह, रशीद साह, पूर्व सदर केंद्रीय अखाड़ा कमेटी इब्राहिम खान, मुजीब खान, उस्ताद अलीरजा हवारी, खजूरी सदर डॉ जमील, उस्ताद शरफू खान, जोखन खलीफा, इम्तियाज आदि ने लोगों को इस्लामिक नया साल की मुबारकबाद देते हुए मोहर्रम का पर्व सादगी से मनाने की अपील की है।



