18वें दिन सत्याग्रह पर बैठे झारखंड के लोकसेवक चिंतामणि साहू

वाराणसी से जगत भाई विश्वकर्मा (विशेष संवाददाता)। न्याय के दीप जलाएं- 100 दिनी सत्याग्रह* सर्वधर्म प्रार्थना के साथ 18 वें दिन में प्रवेश कर गया। झारखंड के गोड्डा जिले के समर्पित लोकसेवक *चिंतामणि साहु* आज उपवास पर बैठे हैं। 75 वर्षीय चिंतामणि साहु का एक दिलचस्प वाकया के साथ गांधी विचार से को निकटता बनी वह उत्तरोत्तर बढ़ती ही चली गई।
वे एक विद्यालय में कार्यरत थे। 1980 में उनके यहां आयोजित परीक्षा में पहली बार नकल कराने का मुहिम शुरू हुआ। इसके एवज में अभिभावकों ने विद्यालय कर्मियों को उपकृत किया। इसके एक हिस्से को लेकर वे घर पहुंचे और अपनी पत्नी को खुशी-खुशी ₹200 दिए। पत्नी ने तुरंत पूछा कि ये पैसे कहां से आए हैं? पैसे का स्रोत सुनते ही पत्नी नाराज हो गई और कहा कि हो सके तो ये पैसे आपने जिनसे दिए हैं, उन्हें लौटा दे या अपने संगियों पर खर्च कर दें। *यह पैसा इस घर में खर्च नहीं होगा, अगर हुआ तो हमारा और हमारे बच्चों का खून खराब हो जाएगा, संस्कार नष्ट हो जाएगा।* इस घटना ने चिंतामणि की जीवन दिशा ही मोड़ दी। वरिष्ठ गांधीवादी डॉक्टर रामजी सिंह के संपर्क में आए और गांधी विचार थे शोध का पंजीयन कराया। परंतु रामजी सिंह के यह कहने पर कि कागज में क्या रखा है – आप तो जीवन के कर्मयोगी है, उसी में रमिये-पीएचडी का मोह छोड़ दिया। भागलपुर के 1989 के दंगे में शांति कार्य में खुद को झोंक दिया। उन मोहल्ले में गए जहां ज्यादा तनाव और जोखिम था।
*अडानी पावर प्लांट विरोधी संघर्ष की अगली कतार में रहे*
रघुवर दास के समय जब झारखंड में डबल इंजन की सरकार हुआ करती थी तब गोड्डा में अडानी पावर प्लांट का काम शुरू हुआ। लोगों की जमीन जबरन अधिग्रहित की जाने लगी।जनता ने प्रतिकार किया। यहां भी चिंतामणि साहु अग्रिम पंक्ति में खड़े थे। दमन का सिलसिला चला। कई मुकदमे हुए। फिलहाल जमानत पर है। सारे छल- प्रपंच अपनाकर सत्ता ने जमीन हथिया ली। कोई चारा न देखकर उनके प्रयास से एक याचिका हाई कोर्ट, रांची में दायर किया गया है। संघर्ष के रूप बदले पर जुल्म का प्रतिकार नहीं थमा।
*गांधी विचार त्रिकाल सत्य है*
सत्याग्रह पर बैठे चिंतामणि करते हैं कि गांधी विचार केंद्र को सरकार अनैतिक तरीके से हथियाने की कोशिश में है। अभी वह सफल भी दिखती है। पर कालांतर में सत्य की जीत होगी। *हम गांधी के विचार पर चलने वाली जमात हैं और यह विचार त्रिकाल सत्य का रूप है।*
*सत्याग्रह प्रभारी डॉक्टर विश्वजीत* ने कहा कि हमें कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हम जहां बैठते हैं वह स्थान वर्षा के चलते बुरी तरह गंदगी से भर जाता है। हालांकि हम ऐसी मुश्किलों का सामना करने के अभ्यस्त हैं। कार्यक्रम प्रभारी *अरविंद कुशवाह* ने जोड़ते हुए कहा कि कठिनाइयां तो हमारे संकल्प की परीक्षा लेती हैं।अतः हम इसे मित्र भाव से ग्रहण करते हैं।



