ईद की नमाज पूर्व फितरा की रकम अदा करना जरूरी-हाफिज मसऊद रजा

हर मालदार आदमी पर फर्ज है जकात
दुद्धी, सोनभद्र। गरीबों की मदद करने व जरूरतों की जरूरतें पूरी करने के लिए अल्लाह पाक ने अपने मालदार खुशहाल बंदों पर जकात व सदक-ए-फित्र वाजिब फरमाया है।
कादरिया तालीमी ग्रुप के उप संस्थापक हाफिज मसऊद रज़ा ने बताया कि इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक जकात हर मालदार शख्स पर दीनी फर्ज है यानी हर मालदार साहिबे निसाब पर जकात फर्ज है। सदक-ए-फित्र जब वाजिब हुआ तो ताजदार ए मदीना सल्लल्लाहो सल्लम ने एक सहाबी से फरमाया कि शहर की गलियों में जाकर ऐलान कर दो कि सदकए फित्र अदा करना वाजिब हो चुका है। हर मुसलमान बालिग औरत व मर्द पर जो साहिबे निसाब (मालदार) हो उन पर अपनी और अपने नाबालिक औलाद की तरफ से फितरा अदा करना जरूरी है। मुस्तहब तो यह है कि ईद की सुबह नमाज से पहले पहले फितरा अदा कर दिया जाए। इसके अलावा उससे पहले रमजान के महीने में भी अदा किया जा सकता है। लेकिन ईद की नमाज के बाद अदा करना गुनाह है। क्योंकि जिस मकसद के लिए अल्लाह पाक ने इसे वाजीब फरमाया है वह करीब-करीब खत्म हो जाता है। फिर भी अगर किसी वजह से नमाज से पहले अदा ना कर सके तो नमाज के बाद भी अदा करना जरूरी है। जैसे कि वक्त पर नमाज अदा करना जरूरी है। अगर वक्त निकल जाए तो भी फितरा अदा करना वाजीब है। हदीस शरीफ में है जिसने फितरा नहीं दिया उसके रोजे व नमाजें जमीन और आसमान के बीच लटकती रहती हैं। फितरा से जहां एक तरफ हमारे दिन भाइयों की जरूरतें पूरी होती हैं तो वहीं दूसरी तरफ हमारी बातें बारगाह ए इलाही में मकबूल होती हैं। और हमें दुनिया की बेसुमार भलाइयां नसीब होती है। 2 किलो 47 ग्राम गेहूं या उसकी कीमत करीब रुपया 60 मात्र फितरा के तौर पर अदा करना, किसी जरूरतमंद दीनी भाई-बहन की मदद करना वाजिब है। चाहे तो एक फितरा एक आदमी को दे दें या कई आदमियों को दें।



