आदिवासी वनवासी क्षेत्र के लिए महापुरुष थे स्व. प्रेमभाई-अजय शेखर

दुद्धी, सोनभद्र (एम.एस.अंसारी)। दूसरों के दुख में तकलीफ महसूस करना और आनंद में आनंदित होने वाला ही महापुरुष होता है। प्रेमभाई भी इस आदिवासी वनवासी क्षेत्र के लिए ऐसे ही महापुरुष थे, जिन्होंने सिर्फ गरीबों के हक के लिए अपना जीवन व्यतीत किया। उक्त बातें वरिष्ठ समाजसेवी व कवि अजय शेखर ने रविवार को वनवासी सेवा आश्रम के संस्थापक व प्रणेता स्व० प्रेमभाई की जयंती को सम्बोधित करते हुए दुद्धी स्थित आश्रम के छात्रावास परिसर में कही। उन्होंने कहा कि बनवासी सेवा आश्रम को विचारों के लिए त्रिवेणी संगम कहा जाता है। गाँधी के विचारों पर चलकर प्रेम भाई ने इस पिछड़े क्षेत्र को जीवंत बनाने का प्रयास किया है। अब तो लोग गाँधी के विचारों को वैचारिक मतभेद में उलझा दिए हैं। गाँधी विचारधारा की हत्या कर दी गई है। आप लोगों ने देखा है कि गांधी जी, विनोवा फुले, जयप्रकाश की विरासतों को धरासायी कर दिया गया है। गांधी के विचारों को माना भी जाता है और ध्वस्त भी किया जा रहा है। हम सभी श्री राम के उपासक हैं। हमारा देश अद्भुत है। जहाँ अलग अलग भाषा संस्कृति है लेकिन भाव एक है। यही भारतीय संस्कृति है। डॉ विभा प्रेम, डॉ लवकुश प्रजापति, रामपाल जौहरी, प्रेमचंद यादव, कुलभूषण पांडेय, अवधनारायण यादव, कस्बा चौकी इंचार्ज कमल नयन दुबे आदि वक्ताओं ने उन्हें क्षेत्र का मसीहा एवं महान विभूति का दर्जा देते हुए कहा कि आज इस लोलुपता भरे समाज में ऐसे ही महान विभूति का आवश्यकता आ पड़ी है जो निःस्वार्थ समाज को नई दिशा प्रदान करे। ऐसे कर्मयोगी महान विभूति के जयंती में शरीक होने का अवसर हमें मिला जिसके लिए कृतज्ञ हूं।
आश्रम के प्रबंधक चित्रांगद दुबे ने उनके कृत्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 10 सितम्बर 1935 में जन्में प्रेमभाई प्रारंभ से ही दयालु स्वभाव के थे। संचालन शिवशरण भाई ने किया।इस मौके पर रामजी पांडेय एड, कृष्णमुरारी पांडेय एड., अनूप कुमार डायमंड, इंदुबाला सिंह, सुरेश प्रसाद एड.,अवधेश जायसवाल, देवनाथ भाई, विमल भाई, धर्मेंद्र सिंह, मनोज पांडेय, आकाश जायसवाल समेत बैडमिंटन टीम व छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।



