सावन मास चले पुरवईया, बैल बेच ले आओ गईया

सावन में भी बारिश न होने से किसानों के चेहरे मुरझाए

कहीं बीया नहीं पड़ा तो कहीं सुख रही नर्सरी
दुद्धी, सोनभद्र (एम.एस.अंसारी)। सावन मास चले पुरवईया, बैल बेच ले आओ गईया, प्राचीन भारत के मौसमविद कहे जाने वाले घाघ की कहावत इस बार दुद्धी क्षेत्र में सटीक बैठक रही है। इस कहावत के अनुसार यदि सावन में लगातार पूर्वी हवा चले तो खेती कमजोर होती है। ऐसे में किसान को बैल बेंच गाय खरीद लेनी चाहिए। कम से कम दूध घी तो मिलेगा।
दुद्धी क्षेत्र में आषाढ़ माह में अपेक्षित वर्षा नहीं होने से खरीफ के मौसम में धान रोपाई का कार्य एक महीना पिछड़ गया। विकास खंड दुद्धी के बघाडू, नगवां, रन्नू, कटौली, मझौली आदि गांवों के कुछ किसान अच्छी बारिश न होने दशा में अपनी पारंपरिक फसल सावां, कोदो, मेड़ो, बाजरा, ज्वार जैसे कम पानी वाली फसलों की बुवाई कर दिए।
बरसात के दिन में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धनौरा, दीघुल, खजूरी, मनबसा, डूमरडीहा, मुरता महुअरिया आदि गांवों में असिंचित क्षेत्रों में बारिश के अभाव में नर्सरी में धान के बिहन पीला पड़ने लगे हैं। सावन का दूसरा सप्ताह बीतने के बावजूद धान की शून्य प्रतिशत रोपनी हुई है।
जाबर के प्रगतिशील किसान अंजनी जायसवाल कहते हैं कि क्षेत्र में इस वर्ष मानसून की शुरुआत से लेकर अब तक एक बार भी अच्छी वर्षा नहीं हुई है। कभी आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादल तो कभी तेज धूप निकल रही है। आद्रा के बाद पुनवर्सु नक्षत्र में भी वर्षा नहीं होने के कारण किसानों को निराशा ही हाथ लगी है। सावन माह शुरु हुए लगभग 15 दिन बीत चुका है। अब तक धान रोपनी शुरु हो जाती थी। लेकिन इस वर्ष हालात बिल्कुल विपरीत हैं।
धनौरा के खेतिहर पंडित मधुसूदन तिवारी ने बताया कि 6 जुलाई से 20 जुलाई तक चलने वाले 15 दिवसीय पुनर्वसु नक्षत्र बिना वर्षा के ही खत्म होने के कगार पर है। इस पक्ष में दो-तीन दिन हल्की वर्षा ही हुई। अधिकतर किसानों ने वर्षा होने उम्मीद में खेतों की जोताई कर धान के बीज डाल दिए। बारिश के अभाव में बिया सुख रहा।
रन्नू गांव के किसान लक्षनधारी ने बताया कि इस साल कम वर्षा देख भदई फसल में उर्द, मक्का तिल, सावन, कोदो, ज्वार, बाजरा, रागी, मूंग, अरहर व मूंगफली जैसी फसलों की बोआई का कार्य पूरा किये। सावन माह में किसानों को धान की रोपनी के बजाय धान की नर्सरी को सूखने से बचाने की चिंता सता रही है। इस वर्ष मानसून की हालात कुछ अलग ही दिखाई दे रहा है। आद्रा नक्षत्र की तरह पुनर्वसु नक्षत्र में भी आसमान में बादल उमड़ घुमड़ रहे हैं। लेकिन वर्षा नहीं हो रही है।
सेवानिवृत्त एडीओ कृषि नंदलाल कहते हैं कि पुनर्वसु एवं पुष्य नक्षत्रों में पृथ्वी सूर्य से 90 से 100 डिग्री अर्थात लंब रहती है, अत: वायुमंडल हल्का होने से वर्षा की अवश्य आशा होती है। इस समय वर्षा न होना दुर्भाग्यसूचक होगा। कवि की कहावत है कि “पुरब पुनर्वसु भरे न ताल। तो फिर भरिहौं अगली साल।



