सोनभद्र

झाड़-फूंक के चक्कर में गई बालिका की जान

देर रात तक होता रहा झाड़-फूंक, स्थिति बिगड़ने पर लाया सरकारी अस्पताल

दुद्धी सोनभद्र। अंधविश्वास के मकड़जाल में अशिक्षित आदिवासी आज भी इस कदर जकड़ा हुआ है कि उसके बदले उसे बहुत बड़ा जान माल का जब नुकसान हो जाता है। बावजूद इसके ईश्वर की नियति मानकर वह उसे मात्र बर्दाश्त कर लेता है। क्षेत्र के ग्राम जोरुखाड़ में बृहस्पतिवार को एक ऐसी ही घटना घटी। गरीबी के साये तले जिंदगी बसर करने वाले आदिवासी परिवार की 12 वर्षीय आरती पुत्री विशुनधारी अगरिया घर के पास ही खाना बनाने के लिए लकड़ी बीन नहीं थी। इस बीच उसके हाथ में किसी जहरीले सांप ने काट लिया। अज्ञानता के अभाव में विशुनधारी अगरिया अपने बेटी को लेकर झाड़फूंक कराने सबसे पहले रामगढ़ कोन गया। उसके बाद वहां से आराम न मिलने पर घीवही गांव गया। वहां भी झाड़-फूंक में आराम न मिलने व स्थिति बिगड़ने पर रात में 12:00 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी लेकर पहुंचा। ड्यूटी ओर तैनात चिकित्सक डॉ संजीव द्वारा इलाज शुरू किया गया। इलाज के दौरान 5:00 बजे भोर में बालिका की मौत हो गई। हॉस्पिटल द्वारा मामले की सूचना मेमो के माध्यम से कोतवाली पुलिस को दे दी गई है।

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