सरकारी योजनाओं में लापरवाही का आरोप, इंडियन बैंक सलखन शाखा पर उठे सवाल
पोर्टल पर लोन स्वीकृत, फिर भी खाते में नहीं पहुंची धनराशि
प्रधानमंत्री के संकल्प और जीरो टॉलरेंस नीति पर उठे सवाल
चोपन/सोनभद्र(ओम प्रकाश गुप्ता)
देश के प्रधानमंत्री का संकल्प है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे और प्रदेश सरकार भी जनहित के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति की बात लगातार करती रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवाल इन संकल्पों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहे हैं।
चोपन क्षेत्र स्थित Indian Bank सलखन शाखा पर सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं, विशेषकर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना एवं सीएम युवा उद्यमी योजना से जुड़े ऋण मामलों में गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। लाभार्थियों का कहना है कि कई आवेदन महीनों से लंबित हैं। कुछ मामलों में पोर्टल पर Loan Sanctioned दिख रहा है, लेकिन खाते में धनराशि नहीं पहुंची, जबकि कुछ आवेदन बिना स्पष्ट कारण के निरस्त कर दिए गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केंद्र और प्रदेश सरकार गरीब, किसान, मजदूर, युवा और मध्यम वर्गीय परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार योजनाएं चला रही हैं, तो पात्र लाभार्थियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं।
आरोप है कि वर्तमान शाखा प्रबंधक के कार्यकाल में सरकारी योजनाओं के संचालन में अपेक्षित पारदर्शिता नहीं दिखाई दे रही, जिससे लाभार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं सीएससी संचालक राकेश केशरी ने जिलाधिकारी सोनभद्र को पत्र भेजकर वर्तमान शाखा प्रबंधक के कार्यकाल के दौरान आए लंबित आवेदन, स्वीकृत आवेदन, निस्तारित प्रकरण, रिजेक्ट आवेदन तथा पोर्टल पर स्वीकृत लेकिन भुगतान लंबित मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
इस मामले पर राकेश केशरी ने कहा,
“सरकार गरीब, किसान, मजदूर और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाएं चला रही है, लेकिन यदि स्थानीय स्तर पर पात्र लाभार्थियों को महीनों भटकना पड़े, पोर्टल पर स्वीकृति दिखने के बाद भी भुगतान न मिले, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। यदि कहीं भी लापरवाही या अनियमितता हो रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। गरीब जनता का अधिकार समय पर मिले, यही हमारी मांग है। सरकारी योजनाएं किसी की कृपा नहीं, जनता का अधिकार हैं।”
उन्होंने मांग की कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा पात्र लाभार्थियों को तत्काल राहत दिलाई जाए।


