रिहन्द विस्थापित विधवा की जमीन पर अवैध कब्जा
मुख्यमंत्री दरबार और तहसील दिवस में शिकायत, कार्रवाई नहीं

बभनी (अजीत पांडेय)थाना क्षेत्र के दरनखाड़ गांव निवासी 75 वर्षीय विधवा सुधरी देवी अपनी रिहन्द बांध विस्थापित भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं। उनकी यह जमीन रिहन्द बांध विस्थापन के तहत उन्हें जीवन यापन के लिए मिली थी, जिस पर अब एक पड़ोसी ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।
लगभग 20 वर्ष पूर्व सुधरी के पुत्र विजय का एक दुर्घटना में गंभीर घायल हो गया था। उसके इलाज के लिए उनके पति स्वर्गीय हरिप्रसाद ने गांव के ही केवल नामक व्यक्ति से 20,000 रुपये में अपनी जमीन गिरवी रखी थी।
पांच वर्ष पहले, पड़ोसी सुरेश विश्वकर्मा ने सुधरी से कहा कि वह उनकी जमीन छुड़वा देगा और जब उनके पास पैसे होंगे तो वह उन्हें वापस कर देंगी। इसके बाद, थाने और पंचायत के हस्तक्षेप से 55,000 रुपये में जमीन छुड़वाई गई। हालांकि, कुछ ही दिनों बाद सुरेश विश्वकर्मा ने उसी जमीन पर जेसीबी से खेत बनाकर कब्जा कर लिया और अब लोगों को धमकी दे रहा है।

सुधरी ने अपनी शिकायत 13 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री दरबार में दर्ज कराई थी, लेकिन उन्हें कोई न्याय नहीं मिला। इसके बाद, उन्होंने 17 फरवरी 2026 को तहसील दिवस में भी शिकायत की, परंतु आज तक इस मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई है। सुधरी 1960 में गहरवार गांव से विस्थापित होकर दरनखाड़ में आकर बसी थीं।
कब्जा की गई जमीन का गाटा संख्या 3849 है, जिसका रकबा 0.64508 है। इस जमीन में सुधरी और रामविलास पुत्र हरिनाम सह-खातेदार हैं। सुरेश विश्वकर्मा पुत्र रामबदन विश्वकर्मा निवासी बभनी ने बिना किसी कानूनी अधिकार के इस भूमि पर कब्जा कर लिया है। सुधरी ने 12 दिसंबर 2024 को थाना प्रभारी/अधीक्षक को भी प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन कार्रवाई होने के बजाय उनके नाती को ही मुकदमे में फंसा दिया गया। शिकायत संख्या 5968780 है।
क्षेत्रीय लेखपाल अरुणोदय पांडेय ने बताया कि तहसील दिवस से शिकायत पत्र मिला है जिसकी जांच एक दो दिन में की जायेगी



