96 वर्षीय सावित्री देवी: द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व सैनिक की पत्नी, जो 50 वर्षों से कर रही हैं गौसेवा

— गौ सेवा करने से होते है,शारीरिक और मानसिक लाभ -सावित्री देवी
म्योरपुर/सोनभद्र (विकास अग्रहरि)
स्थानीय विकासखंड के ग्राम पंचायत खैराही की निवासी एवं पूर्व सैनिक की पत्नी श्रीमती सावित्री देवी पचास वर्षों से भी अधिक समय से गौ सेवा एवं गौ पालन कर रही है।वर्तमान मे 96 वर्षीय श्रीमती सावित्री देवी की उम्र है,बावजूद इनके जज्बे और हौसले इतने ज्यादा बुलंद है कि गौ सेवा करने मे कभी पिछे नही हटती और वह बताती है कि इंसान को कभी हार नही मानना चाहिए चाहे कितनी भी कठिनाईयो का सामना करना पड़े।सावित्री देवी का कहना है कि वह प्रतिदिन सुबह पांच बजे उठकर नित्य क्रियान्वयन कर, वह सुबह और शाम को गौऊवो की सेवा मे निस्वार्थ भाव से लग जाती है।
सावित्री देवी का मानना है कि आज गौ सेवा से ही हम स्वस्थ एवं खुशी से जीवन व्यतीत कर रहे है।
इनका मानना है कि गौ सेवा करने से विशेषकर हमको दो फायदे महसूस होते है,पहला शारीरिक और दूसरा मानसिक।गौ सेवा से शारीरिक एवं मानसिक तौर पर तेजी से विकास होता है।उनका मानना है कि अगर प्रत्येक इंसान गौसेवा करे तो कैसी भी परेशानीया आएंगी कुछ समय बाद वह परेशानी कोशो दूर चली जांएगी।सावित्री देवी का मानना है कि गौ के अंदर 33 करोड़ देवी देवताओ का वास है।
आज के जमाने मे जहां लोग अपने आप को सही डंग से नही चला पाते वही 96 वर्षीय सावित्री देवी बिल्कुल स्वस्थ्य है और हार मानने को तैयार नही होती।अपने को ज्यादा समय गौसेवा मे देती है।उनका कहना है कि इंसान एक दिन शरीर छोड़कर चला जाएगा लेकिन उसकी अच्छाईया और बुराईया यही लोगो के बीच रह जाएगीं,जैसा जो कर्म करेगा वैसा ही फल पाएगा।
# द्वितीय विश्व युद्ध में पैर में लगी थी गोली
सावित्री देवी ने बताया कि उनके पति स्व केदारनाथ दुबे फौज मे थे।
1942 मे स्व केदारनाथ दुबे की भर्ती डोगरा रेजीमेंट मे हुई थी।भर्ती होने के बाद उनको पाकिस्तान के लाहौर मे ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था उस वक्त लाहौर भारत का ही हिस्सा था।फौज मे भर्ती होने के बाद स्व दुबे को साउथ अफ्रीका,सिंगापुर और वर्मा जैसे देश मे फौज के तरफ से कुछ दिनो के लिए भेजा गया था।
1945 मे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत वर्मा युद्ध के लिए भेजा गया था,युद्ध के दौरान केदारनाथ दुबे के बांए पैर के घुटने मे गोली लग गई थी।



