श्री सत्य साई प्रेम प्रवाहिनी रथ यात्रा वैनी गाँव में प्रेम, करुणा और सेवा का अमृत संदेश
वैनी/सोनभद्र (राजन गुप्ता) वैनी गांव, ब्लॉक नगवां जिला सोनभद्र (उत्तर प्रदेश), 6 अगस्त 2025 श्री सत्य साई बाबा के जन्म शताब्दी वर्ष 2025-26 के पावन अवसर पर ग्राम पंचायत वैनी स्थित साई मंदिर से एक भव्य और प्रेरणादायक “प्रेम प्रवाहिनी रथ यात्रा” निकाली गई। यह यात्रा श्री सत्य साई बाबा के दिव्य जीवन, प्रेम, करुणा और सेवा के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का एक सजीव प्रयास रही।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्त्री-पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा में श्रद्धालु भक्त, हाथों में भावनात्मक और जागरूकता से परिपूर्ण तख्तियाँ लिए हुए चल रहे थे, जिन पर लिखा था — “एक ही धर्म – प्रेम का धर्म”, “प्रेम करो, केवल प्रेम करो”, “एक ही भाषा – हृदय की भाषा”, “सदा सहायता करो, कभी दुःख मत दो”। इन नारों ने न केवल वातावरण को भक्तिमय बनाया, बल्कि लोगों के हृदय में प्रेम और सेवा का दीप भी प्रज्वलित किया।
पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालु सामूहिक रूप से “साई गायत्री” मंत्र का जाप करते रहे, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर उठा।
प्रेम का धर्म, सेवा का संदेश
श्री सत्य साई सेवा संगठन के सेवा साधकों श्री श्याम नारायण गुप्ता एवं साई किशोर जी ने प्रेम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि —
“प्रेम ही ईश्वर है, प्रेम ही जीवन है। प्रेम का वास्तविक अर्थ है देना और क्षमा करना। यह नि:स्वार्थ होता है, और इसी में छुपी है जीवन की दिव्यता। हमें अपने जीवन को तुच्छ स्वार्थों में नहीं गंवाना चाहिए, बल्कि इसे प्रेम, सेवा और सद्भाव में समर्पित करना चाहिए।”
प्रशांति निलयम से भारत भ्रमण तक
श्री सत्य साई सेवा संगठन के श्री सुनील कुमार सिंह ने जानकारी दी कि यह यात्रा “श्री सत्य साई प्रेम प्रवाहिनी” के रूप में आंध्र प्रदेश के प्रशांति निलयम, पुट्टपर्थी से आरंभ हुई है। पाँच रथों पर सवार यह यात्रा श्री साई बाबा के प्रेम, सेवा और आध्यात्मिकता के अमृत संदेश को लेकर भारत के पाँच प्रमुख परिक्षेत्रों में भ्रमण कर रही है।
बुधवार दोपहर यह प्रेम प्रवाहिनी यात्रा, वैनी साई मंदिर पहुँची, जहाँ श्री सत्य साई सेवा संगठन के सदस्यों एवं ग्रामवासियों ने भगवान श्री सत्य साई बाबा जी का भव्य स्वागत किया। साई मन्दिर से यह यात्रा दुबेपुर, कम्हरिया, खलियारी, सराईगढ़ एवं वैनी चौराहे से होते हुए पुनः साई मंदिर पहुँची, जहाँ इसका समापन हुआ।
भजन, भंडारा और सेवा का संगम
यात्रा के समापन पर भक्ति संगीत और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे में प्रसाद वितरण किया गया। यह आयोजन केवल आध्यात्मिक यात्रा ही नहीं, बल्कि आत्मिक प्रेम, समुदाय की एकता और सेवा की भावना का जीवंत प्रतीक बन गया।
इस कार्यक्रम की सफलता में मोलन सिंह पटेल, राजन गुप्ता, राम चरन सिंह, हीरालाल पटेल, पखंडू सहित कई समर्पित सेवाभावियों की सक्रिय भूमिका रही।
संदेश:
प्रेम ही एकमात्र धर्म है जो सभी सीमाओं से परे है। जहाँ प्रेम है, वहीं ईश्वर है। इसी प्रेम को अपने जीवन में उतारें, यही श्री सत्य साई बाबा की सच्ची आराधना है।



