दुद्धी से 9 जायरीनों का जत्था उमराह के मुकद्दस सफर पर रवाना

दुद्धी, सोनभद्र (एम.एस.अंसारी)। दुद्धी व आसपास के ग्रामीण अंचलों से रविवार को नौ जायरीनों का जत्था उमराह (छोटा हज) के मुकद्दस सफर पर रवाना हुआ।
कस्बे के वार्ड नं 11 निवासी हाफिज रेजाउल मुस्तफा के नेतृत्व में अपने वालिदैन वरिष्ठ अधिवक्ता मु. सैफुल्लाह उर्फ लाला बाबू व जमीला बेगम, वार्ड नं 4 निवासी अलीरजा हवारी उनकी नेकदुखतर राफिया खातून, दीघुल गांव निवासी अली हुसैन, रज्जब अली बघाडू गांव निवासी मु. इरफान और उनकी अहलिया रुखसाना बानो सहित कुल 9 जायरीन उमरा (छोटा हज) के मुकद्दस सफर पर रवाना हुए। इसके अलावा राफिया खातून के पति रौशन अली मदीने से ही इनके जत्थे में शामिल होकर उमराह करेंगे। रवानगी के पूर्व रविवार की दोपहर एक बजे जायरीन अलग-अलग समूह में जामा मस्जिद पहुंचकर जोहर की नमाज अदा की। नमाज के बाद महफिले मिलाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आगाज हाजी फैजुल्लाह ने अपने नाते पाक “न दौलत न शोहरत खजिने के अंदर, मिलेगी तो जन्नत मदीने के अंदर, तथा “रे मांझी नाव बढ़ा लेना, तैबा नगर में जाकर मिलेगी तुझको खजूरी शाम। हाफिज तौहीद ने “मुश्किलें होती हैं आसान मदीने में चलो, खाली भर जाते हैं दामान मदीने में चलो। रिज्वानुद्दीन लड्डन ने “चलो दायरे नबी की जानिब, दुरूद लब पर सजा-सजा कर जैसी नातेपाक बड़े करीने से पेश की। मुफ़्ती महमूद साहब ने जायरीनों को सफर की मुबारकबाद देते हुए उमराह की फजीलतों को तफसील से बयान कर अरकान अदा करने के तरीके बताए। नाते पाक पेश करते हुए मुफ़्ती साहब ने पढ़ा कि “यादे सरकारे दोआलम में जो घबराता है दिल, जिक्रे सरकारे दोआलम से बहल जाता है दिल। अंत में मुफ़्ती साहब ने उपस्थित लोगों के साथ हाजियों के कामयाब सफर की रूहानी दुआख्वानी की। मिलाद शरीफ समाप्ति के उपरांत नारे तकबीर अल्लाह हू अकबर, नारे रिसालत या रसूल अल्लाह, जायरीन-ए-मदीना जिंदाबाद जैसे इस्लामी नारों के बीच कस्बे से हाजियों को पूरे जोशो खरोश के साथ अक़ीदमंदों ने उमराह की पवित्र यात्रा पर रुखसत किया। सभी जायरीन रविवार की रात 10 बजे बनारस से शिव गंगा से नई दिल्ली जाएंगे। 13 नवंबर की रात इंदिरा गांधी टर्मिनल दिल्ली से रात्रि 8 बजे जद्दा के लिए इनकी फ्लाइट है। वापसी में 30 नवंबर को दिल्ली तथा पहली दिसंबर को अहले सुबह दुद्धी पहुंचेंगे। हाजियों की विदाई जुलूस में सदर कल्लन खान, हाजी निजामुद्दीन, मौलाना जियाउल मोबीन, कौनन अली, हाफिज हकीक, हाफिज अबरार, इरशाद, मुनीर अहमद, डॉ हसीम, मु. सईद अंसारी, लाडले सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।



