सोनभद्र

विद्यार्थी परिषद द्वारा दुद्धी नगर में आयोजित की गई पावन खिण्ड दौड़

दुद्धी, सोनभद्र (एम.एस.अंसारी)। स्थानीय नगर में शनिवार को पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस से दुध्दी नगर में स्थित काली मंदिर मोड़ तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा पावन खिण्ड दौड़ का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दुध्दी जिला कार्यवाह रविन्द्र जी, अभाविप विभाग संगठन मंत्री अनिल जी द्वारा अभाविप का झंडा दिखा कर दौड़ को रवाना किया गया। इस पावन दौड़ में सोनांचल इंटर कालेज, अनुभव विद्यालय कादल, आदर्श इंटर कालेज महुली के सैकड़ों विद्यार्थियों ने भाग लिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाह रविन्द्र जी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि यह वह दौड़ है, जिसके जरिये छत्रपति शिवाजी के साथी बाजी प्रभु देशपांडे ने अफजल खान की घेरेबंदी तोड़ी थी करीब 350 वर्ष पूर्व पन्हालगढ़ किले में रुके छत्रपति शिवाजी, उनके साथियों और 800 सैनिकों को औरंगजेब के सेनापति अफजल खान ने 20 हजार सैनिकों संग घेर लिया था। सीधी लड़ाई संभव नहीं थी। रसद खत्म हो रही थी। वहां से बच निकलने का निर्णय लिया। दुश्मन को धोखा देने के लिए दो पालकी तैयार कराई। एक में शिवाजी बैठे और दूसरे में उनका नाई। हालांकि दुश्मन को पता लग गया और उसने चार हजार सैनिकों के साथ शिवाजी का पीछा किया। शिवाजी को 52 किमी दूर विशालगढ़ जाना था। विशालगढ़ से 12 किमी पहले घोड़ खिंड स्थान पर दुश्मन काफी पास आ गया। शिवाजी के साथी बाजी प्रभु देशपांडे 300 सैनिकों के साथ रुके और अन्य सैनिकों को शिवाजी के साथ भेज दिया। बाजी प्रभु ने दुश्मनों को तब तक रोके रखा, जब तक शिवाजी ने तोप दागकर विशालगढ़ पहुंचने का संकेत नहीं दे दिया और इसके बाद सभी सैनिक दुश्मनों संग लड़ते लड़ते शहीद हो गए। वहीं उपस्थित सोनभद्र विभाग संगठन मंत्री अनिल जी ने कहां कि छत्रपति शिवाजी महाराज पर संकट की घड़ी में मराठा जनरल बाजी देशप्रभु पाण्डे ने 300 सैनिकों को लेकर घोड़ा खिंण्ड नामक स्थान से लेकर 56 किलोमीटर दुर तक आदिलशाह के हजारों सैनिकों को उलझा कर तब तक रखा जब तक छत्रपति शिवाजी महाराज विशालगढ़ पर सुरक्षित नहीं पहुंच गए।और यह होने वाली पावन खिंण्ड दौड़ बलिदानी सैनिकों के बलिदान का साक्षी है यह स्थल जो भारत देश के स्वाभिमान और अस्मिता से जुड़ी दौड़ हमें एक गौरव का एहसास कराती है ।यह वर्तमान कि दौड़ मैराथन शब्द का उपयोग करते हैं। क्या किसी को पता है कि यह मैराथन शब्द कहां से आया? अगर हम इस शब्द के बारे में जानने का प्रयास करेंगे तो समझ में आएगा कि यह हम पर थोपा गया है। सवाल यह है कि जब हमारे पास उपयुक्त वीरगाथाओं की लम्बी श्रंखला है, तब हम क्यों ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, जो नकारात्मकता का बोध कराते हैं।
जिला संगठन मंत्री विवेक जी ने बताया कि मैराथन शौर्य की याद से जुड़ा है, लेकिन उस देश के, जिसका भारतीयों से कोई मतलब नहीं है। यह एथेंस के सिपाही का शौर्य था, जो अपने देश के लिए 42 किमी तक लगातार दौड़ा था। भारतीयों के लिए ऐसी दौड़ होनी चाहिए, जो उन्हें अपने शौर्य की याद दिलाए। इस दौरान चेयरमैन कमलेश मोहन, अमन जायसवाल, नीरज शर्मा, विशाल तिवारी, मनोज तिवारी, दिलीप पांडेय, गुलशन पटेल सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सुरक्षा के मद्देनजर नागेश सिंह रघुवंशी ने महिला कांस्टेबल के साथ सभी छात्रों को मिशन शक्ति के तहत जागरूक किया।

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