सोनभद्र

मोबाईल व आधुनिकता की चकाचौंध से दूर रहकर लिखी सफलता की इबारत

दुद्धी के तीन छात्रों ने जिले में किया टॉप

पढ़ना है तो मोबाईल और शोशल मीडिया से दूर रहना है

दुद्धी, सोनभद्र (एम.एस.अंसारी)। आईना बनने से बेहतर है कि पत्थर बनो, जब तराशे जाओगे तो देवता कहलाओगे। शायर की यह पंक्तियां दुद्धी क्षेत्र के उन प्रतिभावान होनहारों पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जो अपनी पढ़ाई के दौरान किताबों तक ही अपने आपको एकाग्रचित्त रखा। दुद्धी जैसे पिछड़े क्षेत्र जहां एक भी मान्यता प्राप्त हाईस्कूल या इंटर की कोचिंग छात्रों को मयस्सर नही है, वहां के बच्चों का 98 प्रतिशत नंबर ला देना बेहद गौरतलब है। यह ऐसे ही संभव नही हो पाया है। इसके पीछे यकीनन छात्रों की वो कुर्बानियां हैं जो आज के दौर हर लड़के-लड़की की कमजोरी है। टॉपरों का अपने आपको मोबाईल या सोशल मीडिया से दूर रख पाना उनकी कामयाबी की इबारत लिखने में सबसे बड़ी भूमिका अदा किया। यही मूलमंत्र रहा कि आदिवासी पिछड़े क्षेत्र के छात्रों ने सीमित संसाधनों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट आईसीएससी की परीक्षा में यह साबित कर दिखाया है कि अगर हौसले बुलंद हो तो दुश्वारियां राह में रोड़ा नहीं बन सकती।

जिग्यांशु ने इंटर की परीक्षा में 94 फीसद अंकों के साथ न सिर्फ अपने जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उसकी इस सफलता से विद्यालय परिवार एवं परिजनों के साथ साथ गांव लोग गौरवान्वित हैं। जिग्यानशू के पिता जीवन राम दुद्धी कचहरी में वकालत करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। जिला टॉपर जिज्ञानशु के दो भाई एक बहन सभी ने स्कूल को टॉप किया है। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले सब भाई बहन आधुनिकता की चकाचौन्ध से अपने आपको इतर रखा।
हाईस्कूल टॉपर आर्यवीर सिंह ने आईसीएसई बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में दुद्धी के आर्यवीर ने 98 फीसदी अंक लाकर जिले का नाम रौशन किया है। दुद्धी के पड़ोसी गांव धनौरा निवासी शिक्षक सन्तोष सिंह के पुत्र आर्यवीर ने दुद्धी के जेम्स इंग्लिश स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर, रेनुकूट की डीसी लेविस स्कूल से पढ़ाई कर रहा था। प्रारंभ से ही शांत स्वभाव एवं पढ़ाई के प्रति लगनशील रहे आर्यवीर ने अपनी हर क्लास में अव्वल रहा है। आर्यवीर पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन मोबाईल को मानता है। घर मे अभिभावकों की मोबाईल बजती रहती थी मगर कई बार ऐसा हुआ कि किताबें छोड़कर आर्यवीर ने काल रिसीव करने की जहमत नही उठाई। फिलहाल राजस्थान के कोटा में तैयारी कर रहे हैं। उनकी आगे चलकर आईपीएस बनने की इच्छा है। हालांकि आर्यवीर के पिता ने अपनी शिक्षा दीक्षा के दौरान सन 2000 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी टॉप किया था। जिसके बाद राज्यपाल द्वारा सम्मानित भी किया गया था। राज्यपाल द्वारा पिता को सम्मान की दीवार पर लगी तस्वीर भी उसे प्रेरणा देती रही।
हाईस्कूल टॉपर सृजन अग्रहरि बिना किसी कोचिंग के सेल्फ स्टडी द्वारा आईसीएसई बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में 96 फीसदी अंक लाकर जिले का नाम रौशन किया है। मूलतः दुद्धी के नगर पंचायत के रामनगर निवासी व्यवसाई गोपाल अग्रहरि के पुत्र सृजन ने दुद्धी के जेम्स इंग्लिश स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर, रेनुकूट की डीसी लेविस स्कूल से पढ़ाई कर टॉप किया। इसकी इच्छा है कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने। जबकि सृजन से दो बड़ी बहन ने भी हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा में जिला टॉप कर चुकी हैं।

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