सोनभद्र

सोन संगम शक्तिनगर ने मनाया 6ठा स्थापना दिवस

शक्तिनगर/सोनभद्र साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम शक्ति नगर की ओर से छठवा स्थापना दिवस का आयोजन किया गया ।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री विनय कुमार अवस्थी अपर महाप्रबंधक तकनीकी सेवाएं ,एनटीपीसी शक्तिनगर के द्वारा किया गया । कार्यक्रम का श्री गणेश डॉक्टर बृजेंद्र शुक्ला तथा रविंद्र मिश्रा के द्वारा गणेश वंदना तथा सरस्वती मां की स्तुति से हुआ ।इसके पूर्व उपस्थित अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण पुष्पांजलि तथा दीप प्रज्जवलन किया गया ।अतिथियों का स्वागत करते हुए श्री विजय कुमार दुबे ने कहा कि आज का दिन कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। जहां आज पूरा राष्ट्र नव वर्ष मना रहा है वहीं दूसरी हो शक्ति की आराधना भी की जा रही है।सों सोन संगम के सचिव, डा मानिक चंद पांडेय ने सोन संगम की स्थापना की पृष्ठ भूमि की चर्चा करते हुए वर्ष का

प्रतिवेदन पेश करते हुए,उपस्थित लोगो को बधाई दिया ।विचार गोष्ठी के क्रम मे अपने विचार व्यक्त करते हुए, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ पत्रकारिता के प्रोफेसर डॉक्टर छोटेलाल जायसवाल ने कहा कि, सोन संगम शक्ति नगर ने कम समय में साहित्यिक एवं सामाजिक क्षेत्र में जो उपलब्धियां प्राप्त की है ।वह अति प्रशंसनीय है ।दूसरे वक्ता के रूप में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एनटीपीसी शक्तिनगर के समाजशास्त्र के प्रोफेसर डॉ विनोद कुमार पांडेय ने सोम संगम की उपलब्धियां को रेखांकित करते हुए कहा कि, देखा जाए तो इस 6 साल की संस्था ने 36 साल के बराबर कार्य किया है। इसने एक बडे अन्तर कोअपने सेवा के माध्यम से पूरा किया है। इसकी उपलब्धियां सराहनिय है ।
इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की अध्य्क्षता कर रहे, विनय कुमार अवसथी अपनी रचना कुछ इस तरह पेश किया —+- मां अंबे वह शक्ति दो अटल रहूं सच राह।
मानवता हो धर्म तो पर सेवा परवाह।
नाम शैलपुत्री प्रथम दुर्गा का अवतार ।
देवी अपने भक्त पर करती कृपा अपार ।।
जाने माने कवि माहिर मिर्जापुर ने अपनी पंक्तियां कुछ इस अंदाज में बयान किया
सूरती सुपारी पान जर्दा न खाया करो ।
बेकार की बातों में वक्त न जाया करो ।
इरादे बुलंद रखो दिल में हमेशा ।
जेहन इल्म हासिल में लगाया करो ।
डॉ बृजेंद्र कुमार शुक्ला ने अपनी कविता को मां भगवती को अर्पित करते हुए कुछ इस तरह व्यक्त किया
मैं तो कब से तेरी शरण में ।
मेरी मां मुझे भी तो ज्ञान दे ।।
प्रज्ञा चक्षु रविंद्र मिश्रा ने समय को क्षण भंगुरता को अपनी कविता के माध्यम से इस प्रकार प्रस्तुत किया
कोई न जाने अगले पल की ।
जिओ आज की छोड़ो कल की ।।
श्रीमती विजय लक्ष्मी पटेल ने अपनी कविता में मानव को कर्म के प्रति समर्पित होने की बात की
है मनुज कर्मवीर तू वन ,
कर्म पथ पर चलता चल ।
लाखों आए विपदाएं ,
पीछे मुड़ न चलता चल।। ।कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अजय लक्ष्मी पटेल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्रवण कुमार के द्वारा किया गया इस कार्यक्रम में मुकेश रेल डॉक्टर अविनाश कुमार दुबे डॉक्टर मनोज कुमार गौतम मदनलाल उदय नारायण शिव शंकर त्रिपाठी, अवधेश, सीताराम ,वीरेंद्र पटेल ,अंकित पवन देव,गुलाब सिंह, पप्पू चायवाला के साथ-साथ अन्य लोग उपस्थित रहे।

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