फसल अवशेषों को खेतों में सड़ाना मिट्टी को टॉनिक जैसा-कृषि इंजीनियर कृष्णमोहन

किसान प्रगतिशील सोच रखकर करे कृषि कार्य-डॉ विपिन साहू

दुद्धी, सोनभद्र (एम.एस.अंसारी)। कोई भी फसल मृदा से ही पोषक तत्व लेता है और वह पोषक तत्व उसके पत्तियां, तने और दानों में होते हैं। उक्त बातें दुद्धी दौरे पर आए बायोवेद रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज, प्रयागराज के एग्रीकल्चर इंजीनियर कृष्णमोहन कुमार श्रीवास्तव ने कही। बताया कि दानों को तो हम प्रयोग कर लेते हैं। तने और पत्तियों को खेत से बाहर निकाल देते हैं या फिर हम उसे जला देते हैं। इस गलत प्रक्रिया से हम अपने खेतों की मिट्टी के पोषक तत्व की हानि कर बैठते हैं। श्री श्रीवास्तव आगे कहते हैं कि यदि हम उस पौधे के पत्तियों और तने को खेत में ही सड़ा दें तो मृदा को सूक्ष्मपोषक तत्व या फिर नाइट्रोजन फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फर हो, वह भी मिल जाते हैं। इससे हमें मृदा की उर्वरता शक्ति बनी रहती है। इस पद्धति को अपनाने से अगली फसल के लिए ज्यादा उर्वरक नहीं देना पड़ता है।
कृषि रसायन व मृदा विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ विपिन साहू ने बताया कि यदि हम फसल अवशेष जला देते हैं तो पोषक तत्वों का हानि होने के साथ-साथ लाभदायक जीवाणु, फंगस नष्ट हो जाते हैं। जो हम रासायनिक उर्वरकों पर खर्च कर रहे हैं, वह खर्च हमारा कम हो जाएगा और मृदा स्वास्थ्य अच्छा रहेगा । जो भी फसल अवशेष होते हैं उसको सड़ाने में हमारे सूक्ष्म जीवाणु, फंगस ही उसे सड़ाते हैं। थोड़ा सा यूरिया या डीएपी डाल दें जिससे की फसल अवशेष जल्दी सड़ जाते हैं। किसान थोड़ा सा प्रगतिशील सोच रख कार्य करे तो मृदा की उर्वरता शक्ति बनी रहेगी और रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम व ना के बराबर ही करना पड़ेगा और फसल उत्पादन अच्छा होगा। मृदा की भौतिक गुण अच्छा बना रहेगा।



