आखिर कब बनेगी लौवा नदी पुल की क्षतिग्रस्त सड़क
दुद्धी, सोनभद्र। केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से लउवा नदी के पुल पर कभी भी भयानक हादसा घटित होने की संभावना प्रबुद्ध वर्ग के लोगों द्वारा जताई जा रही है| पुल के दोनों छोर की सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है| तेजरफ्तार भारी एवं हल्के वाहन अचानक पुल के समीप बड़े-बड़े गड्डे देख अक्सर वाहन से नियन्त्रण खो देते है| जिससे अनियंत्रित वाहन उछलते कूदते पुल को पार कर जाती है| इसको लेकर कई बार संबंधित अधिकारीयों एवं कार्यदायी संस्था को लिखित, मौखिक एवं समाचार पत्र के माध्यम से अवगत कराने के बावजूद उनके कान पर जूं रेंगता नही दिख रहा है| इससे चिंतित लोगों ने शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए कुछ माह पूर्व ही निर्मित क्षतिग्रस्त हाइवे की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कारवाई की मांग की है|
रीवां-रांची राष्ट्रीय मार्ग पर तहसील मुख्यालय से सटे बीड़र गांव के समीप लउवा नदी पर इसी साल पुल बनकर तैयार हुआ है| पुल पर आवाजाही शुरू होने के करीब छह माह बाद काफी हो हल्ला मचाने के बाद संबंधित कंपनी ने जैसे-तैसे सड़क निर्माण कार्य पूर्ण का रिपोर्ट संबंधित अभियन्ताओं के जरिये लगवा लिया| भुगतान होने के बाद कार्यदायी कंपनी यहां से बोरिया बिस्तर समेट कर चली गई| सड़क बनने के कुछ ही दिन बाद वह जहां-तहां से उखड़ने लगी| इस बाबत लोगों ने शिकायत किया,तो कुछ दिन पूर्व उसमे बड़े-बड़े पत्थर एवं मिटटी डालकर गड्डो को एनएचआई के कर्मियों ने हाथ से भर दिया| किन्तु वह भी कामयाब नही हुआ| आलम यह है कि सप्ताह में दो बार गड्डे भरे जाते है,जितना भरा जाता है,उससे कही ज्यादा दुसरे दिन से उखाड़ना शुरू हो जाता है| नदी के दोनों छोर पर मंदिर होने की वजह से वहां सुबह शाम लोगों की भारी भीड़ जुटी रहती है| इससे तेज रफ्तार भारी एवं हल्के वाहन अचानक पड़ने वाले गड्डे को देख वाहन चालक अक्सर अपना संतुलन खो देते है| जिससे वहां हादसे की संभावना बनी रहती है| इस बाबत एनएचआई के सहायक अभियंता शैलेस यादव ने बताया कि समस्या उनके संज्ञान में है| इसके लिए संबंधित कार्यदायी संस्था को लिखित एवं मौखिक रूप से कई बार निर्देशित किया गया है|



