बिन ब्याही मां बनने वाली आदिवासी युवती अस्पताल के लिए बनी सिरदर्द
सीएचसी अधीक्षक ने युवती को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए किया पत्राचार

विंढमगंज पुलिस ने कथित प्रेमी के विरुद्ध दर्ज किया मुकदमा
दुद्धी, सोनभद्र। चार दिन पूर्व सीएचसी में भर्ती बिन ब्याही मां बनी आदिवासी किशोरी अब अस्पताल वालों के लिए सिरदर्द साबित होने लगी है। आदिवासी किशोरी से संबंध बनाने वाले युवक व उसके परिवार के लोग चुप्पी साधे हुए हैं वहीं किशोरी के परिजन भी उसे ले जाने इंकार कर रहे हैं।
बताना मुनासिब होगा कि चार दिन पूर्व 9 जुलाई की रात क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय परिसर में बीते कुछ दिनों से शरण लिए 17 वर्षीय आदिवासी किशोरी एक बच्ची को जन्म दिया था। 10 जुलाई को तड़के कुछ ग्रामीणों की नजर खून से लथपथ किशोरी व् बच्चे पर पड़ी, तो वे झट 102 एंबुलेंस की मदद से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज कर इलाज शुरू कराया।
अस्पताल में इलाज शुरू होने के बाद किशोरी ने अपने प्रेमी व बच्चे के पिता का नाम लिया, तो पूरा गांव हैरान हो गया। बहरहाल कनहर नदी के दोनों तट पर आमने सामने आबाद गांव निवासी प्रेमी-प्रेमिका को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम हो गया। वहीं दूसरी ओर किशोरी के स्वजन उसे एवं उसके बच्चे को उसके कथित प्रेमी के घर भेजने की बात सोच इलाज करा रहे थे। लड़की के पिता द्वारा यह भी कहा गया था कि हिला हवाली किये तो उनके खिलाफ कानूनी कारवाई करूँगा। चार दिन बीतने के बाद युवक या उसके घर के किसी सदस्य के अस्पताल में न आने से लड़की के पिता का हौसला टूट गया। गरीब आदिवासी अपनी बच्ची को अस्पताल छोड़कर खुद अकेले अपने घर चला गया। युवती और नवजात बच्ची अस्पताल वालों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। इस संदर्भ में केंद्र अधीक्षक डॉ शाह आलम ने कोतवाली पुलिस को अविवाहित आदिवासी युवती को अस्पताल से उसके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए पत्राचार किया है। विंढमगंज थानाध्यक्ष ने बताया कि शुक्रवार को लड़की का बयान दर्ज करने मैं स्वयं सीएचसी दुद्धी गया था।
मामले में कथित प्रेमी के विरुद्ध 376 पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।



