आइपीएफ के पत्र पर पर्यावरण मंत्रालय ने की कार्रवाई
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच करने का आदेश
सहकारी समितियों के माध्यम से हो खनन
सोनभद्र। जनपद में पर्यावरण संकट और प्रदूषण की गंभीर समस्या के मामले में आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट द्वारा 20 मई को प्रेषित पत्र को संज्ञान में लेते हुए केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच करने के लिए निर्देशित किया है। आइपीएफ के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर द्वारा पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पत्र प्रेषित कर जनपद में प्राकृतिक संसाधनों की लूट , वाईल्ड लाईफ व सेंचुरी जोन तक में अवैध खनन और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के उल्लंघन से गंभीर पर्यावरण संकट और जानलेवा प्रदूषण के मामले में प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई थी।
गौरतलब है कि एनजीटी की रिपोर्ट के अनुसार यहां की हवा में फैक्ट्रियों से निकला फ्लोराइड, मरकरी और शीशा है। रिहंद जलाशय व ओबरा डैम का पानी भी जहरीला हो चुका है, दरअसल इसमें फ्लोराइड, मरकरी आदि स्वास्थ्य के लिए अति घातक पदार्थ हैं, जिनका शोधन करना अमूमन संभव नहीं है। रिहंद जलाशय से सैंकड़ों गांवों के ग्रामीण गर्मी के मौसम में अन्य स्रोत के अभाव में मजबूरन पानी पीने को विवश हैं और हर घर नल योजना के तहत भी म्योरपुर व बभनी ब्लॉक में रिहंद जलाशय से पेयजलापूर्ति सुनिश्चित किया जाना है। 28 अगस्त 2018 को टॉक्सीलॉजिकल लैब बनाने के एनजीटी के आदेश पर भी अमल नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि शत प्रतिशत फ्लाई ऐश के निस्तारण सुनिश्चित करने के आदेश का घोर उल्लंघन हो रहा है। सुझाव दिया गया कि डंपर व ट्रक खुले न हों और रात्रिकालीन परिवहन हो इसे भी लागू किया जाए। अनपरा में रेल मार्ग से कोल परिवहन की पर्याप्त क्षमता के बावजूद सड़क मार्ग से कोयला का परिवहन जानलेवा प्रदूषण व सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने कहा कि अगर प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर रोक लगाई जाए, स्थानीय लोगों की सहकारी समितियों के माध्यम से खनन हो तो पर्यावरण संरक्षण के साथ ही रोजगार व विकास का सवाल भी हल होगा।



