विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर आदिवासियों ने निकाला पैदल मार्च, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

सोनभद्र (ओम प्रकाश गुप्ता) विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को अखिल भारतीय आदिवासी महासभा सोनभद्र एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सोनभद्र के संयुक्त तत्वावधान में आदिवासी समुदाय की लंबित समस्याओं के निराकरण और अधिकारों के संरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों आदिवासी ग्रामीणों ने राबर्ट्सगंज नगर के चुर्क तिराहे से जिलाधिकारी कार्यालय गेट तक पैदल मार्च निकाला। इसके बाद राज्यपाल के नाम संबोधित मांग पत्र एसडीएम सदर को सौंपा गया।
सीपीआई जिला सचिव कामरेड आर.के.शर्मा ने कहा कि सोनभद्र प्रदेश का प्रमुख आदिवासी बाहुल्य जनपद है, जहां गोंड, खरवार, बैगा, भुइयां, कोल, चेरो, माझी, पनिका, धूरिया, कोरकू एवं मुसहर-वनवासी सहित विभिन्न समुदाय लंबे समय से निवास करते हैं। इसके बावजूद आदिवासी समाज आज भी भूमि अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। ज्ञापन में वनाधिकार कानून-2006 के तहत लंबित और निरस्त दावों की निष्पक्ष पुनः समीक्षा कर भूमि पट्टे देने, दावों के निस्तारण तक बेदखली रोकने तथा ग्राम सभाओं को अधिकार देने की मांग की गई। इसके अलावा सोनभद्र में कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना, दुद्धी, बभनी, म्योरपुर और चोपन जैसे क्षेत्रों में एकलव्य विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा आदिवासी बहुल गांवों में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की मांग उठाई गई। वही देव कुमार विश्वकर्मा ने आदिवासी गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने, लघुवन उपज के लिए सरकारी क्रय केंद्र स्थापित करने, खनन प्रभावित परिवारों को डीएमएफ से लाभ एवं रोजगार देने और आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों की समीक्षा कर फर्जी मुकदमे वापस लेने की मांग की। साथ ही एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम का प्रभावी पालन तथा आगामी जाति जनगणना में ‘आदिवासी धर्म’ के लिए पृथक विकल्प देने की मांग किया गया।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय की मांग को मजबूती से उठाते हुए वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में उच्च शिक्षा की बेहतर व्यवस्था के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना जरूरी है और कहा कि शिक्षा के बिना किसी भी समाज का समग्र विकास संभव नहीं है। जनपद सोनभद्र में विश्वविद्यालय की स्थापना होने से जनपद पर लगा पिछड़ापन का तमगा हटाया जा सकता है और चार राज्यों की सीमा को समेटे जनपद की कनेक्टिविटी और विकास में नई रेखा साबित हो होगी, इस लिए भाकपा और लगातार इस सवाल को लेकर आंदोलन कर रही है।
अन्य वक्ताओं ने जनपद वनाधिकार अधिनियम और पेसा एक्ट का कड़ाई से पालन कराएं जाने की बात को उठाया। ।
अखिल भारतीय आदिवासी महासभा जिला कमेटी सोनभद्र के संयोजक मंडल के सदस्य अकबर सिंह गोंड , लक्ष्मण बादी, मुन्नीलाल खरवार, जगन्नाथ बैगा आदि कार्यक्रम का नेतृत्व किए।
इस दौरान मुख्य रूप से देव कुमार विश्वकर्मा, बसावन गुप्ता, राम जन्म कुशवाहा, अमर नाथ सूर्य , प्रेम चंद गुप्ता , चन्दन प्रसाद, हृदय नारायण गुप्ता, मुन्नी लाल खरवार, सूरज बंशल, नागेन्द्र कुमार, जगरनाथ बैगा, बुधवंत, जयपाल सिंह , देवंती देवी, सोनमती, शीतल, राजेंद्र, भगवान दास , कैलाश, सीता देवी, जगबंधन गोंड, बजरंगी गोंड, लक्ष्मण गोंड,जोगेंद्र गोंड, आदि नेताओं के साथ सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।


