स्वराज साथियों को मिला ग्राम परिवर्तन का मंत्र, चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ
45 गांवों से पहुंचे 45 प्रतिभागी, कथनी-करनी की एकरूपता पर दिया गया जोर
म्योरपुर/सोनभद्र ( विकास अग्रहरि)
म्योरपुर। स्थानीय बनवासी सेवा आश्रम में चार दिवसीय “स्वराज साथी प्रशिक्षण कार्यशाला” का शुभारंभ सन्दर्भ व्यक्तियों एवं स्वराज साथियों द्वारा पौधों को जल अर्पित कर किया गया। कार्यशाला में क्षेत्र के 45 गांवों से आए 45 स्वराज साथी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करना तथा युवाओं में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सन्दर्भ व्यक्ति देव नाथ सिंह ने कहा कि एक स्वराज साथी की वास्तविक पहचान उसकी कथनी और करनी की एकरूपता से होती है। समाज में विश्वास, सम्मान और नेतृत्व तभी स्थापित होता है जब व्यक्ति अपने विचारों और सिद्धांतों को व्यवहार में उतारता है। उन्होंने प्रतिभागियों से ईमानदारी, सेवा भावना और सामाजिक सरोकारों के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण के प्रारंभिक सत्र में सभी स्वराज साथियों ने अपने-अपने गांवों में किए जा रहे सामाजिक कार्यों एवं अनुभवों को साझा किया। प्रतिभागियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े अपने प्रयासों की जानकारी दी।
कार्यशाला में शुभा प्रेम ने ग्राम स्वराज की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गांवों को सशक्त बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी भी गांव के विकास के लिए सबसे पहले उसकी समस्याओं, संसाधनों और सामाजिक परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। जब युवा गांव की जरूरतों को समझकर कार्य करेंगे, तभी आत्मनिर्भर और सशक्त ग्राम स्वराज की परिकल्पना साकार हो सकेगी।
इस अवसर पर केवला दुबे, प्रदीप पांडेय, राकेश कुमार, चंद्रावती, मनोज यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राकेश ने किया। कार्यशाला के आगामी सत्रों में नेतृत्व विकास, सामाजिक सहभागिता और ग्राम स्वराज से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।



