सोनभद्र

दुद्धी क्षेत्र में बरसात शुरू होते ही सर्पदंश के शिकार होने लगे ग्रामीण

करैत, कोबरा व जाड़ा सांप के डसने के ज्यादातर मामले

दुद्धी, सोनभद्र। बरसात का मौसम शुरू होते ही सर्पदंश की घटनाएं घटित होने लगी हैं। सीएचसी में प्रतिदिन सांप काटे मरीज पहुंचने लगे हैं। वृहस्पतिवार को दीघुल गांव निवासी 60 वर्षीय वसीउल्लाह पुत्र अब्दुल अजीज को सुबह 8 बजे बोरिंग मशीन पर नहाते समय करैत सांप ने डस लिया जबकि 15 साल के दीपक पुत्र स्व. शिवप्रकाश निवासी मेदनीखाड़ को सुबह 9 बजे जानवर चराते समय जंगल में जाड़ा सांप ने काट लिया। इसके पूर्व मंगलवार को ग्राम झारोकलां में कक्षा 5 का छात्र 10 वर्षीय अविनाश गोंड पुत्र तिलकधारी गोंड को रात करीब नौ बजे अपने आंगन में ही बाएं पैर में करैत सांप ने काटा था। सीएचसी में समुचित इलाज के बाद वृहस्पतिवार को उसे छुट्टी दे दी गई। सर्पदंश शिकार के जो मरीज सरकारी अस्पताल आ रहे हैं उनकी प्राणरक्षा निःशुल्क एंटी स्नैक वेनम (सांप की सुई) लगाकर चिकित्सकों द्वारा कर ली जा रही है मगर अज्ञानता के कारण जो मरीज झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र व जड़ी-बूटी के चक्कर में पड़ रहे हैं उन्हें उनकी इस लापरवाही का नतीजा जान देकर भुगतना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्पदंश के मरीजों की जागरूकता के लिए एक अभियान छेड़ने की अनिवार्यता महसूस की जा रही है।
सांप काटने की ज्यादातर घटनाओं के शिकार ग्रामीण अंचलों के रहवासी होते हैं, गांव के लोगों को सही समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता है। सर्पदंश का शर्तिया इलाज होते हुए भी चिकित्सा विभाग की जागरूकता अभियान न चलाने जैसी कुप्रबंध की वजह से आमजन को जानकारी नहीं मिल पाती है। मरीज सही जानकारी के अभाव में अस्पताल तक जा ही नहीं पाते और वह अपने गांव में अक्सर झाड़-फूंक, जड़ी-बूटियां और तंत्र-मंत्र पर भरोसा करते हैं। इन पद्धतियों से इलाज के दौरान यदि सांप जहरीला हुआ तो मरीज की मौत हो जाती है। मरीज के परिजनों द्वारा उसे नियति समझ लिया जाता है। अगर मरीज बच जाता है तो मंत्र-तंत्र के प्रति आस्था बढ़ जाती है। सच तो यह है कि विषैला सांप के काटने पर एंटीस्नैक वेनम के अलावा कोई नहीं बचा सकता है, पर विडंबना यह है कि गांव तक इस इलाज की पहुंच ही नहीं बन पाई है। इसका कारण गांव और अस्पतालों के बीच एक गहरी खाई भी है। ज्यादातर ग्रामीण में इस बात की जागृति ही नहीं है कि सर्पदंश होने पर मरीज को अस्पताल भी ले जाना चाहिए। सांप काटे मरीजों में केवल 6 फ़ीसदी में शिनाख्त हो पाती है कि उसको किस सांप ने काटा है। डॉक्टर के लिए जरूरी हो जाता है कि वह मरीज को देखकर पहचान कर सके कि किस सांप ने काटा है। चिकित्सक द्वारा लक्षणों को देखकर ही तय किया जाता है मामला कितना गंभीर है। इस आधार पर मरीज को एंटीस्नैक वेनम की खुराक तय की जाती है। दुद्धी में क्षेत्र में हर साल वर्षा के दिनों में करैत सांप के दंश से आदिवासी असमय मौत के मुंह में चले जाते हैं। आदिवासियों को इस बात का पता ही नहीं है कि सांप काटे का इलाज अस्पताल में भी होता है।
स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्पदंश का टीका उपलब्ध होने के बावजूद कोई सूचना या विज्ञापन नहीं मिलेगा जो यह बताता हो की सांप के काटने का इलाज भी यहां मौजूद है। हजारों दवाइयां की सूची में भले एंटीस्नैक वेनम सुई के आगे उपलब्ध का निशान लगा हो, लेकिन आम जन को जागरूक करने के लिए यह काफी नहीं है। जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है कि सर्पदंश के ज्यादातर मामले गांव में होते हैं। यदि मामला संपन्न समाज से जुड़ा होता तो प्रचार-प्रसार पर विभाग द्वारा ध्यान दिया जाता। एक अनुमान के मुताबिक 90 फ़ीसदी सांप के काटे रोगी अस्पताल जाने के बजाय तंत्र-मंत्र और जड़ी बूटियां पर भरोसा करते हैं। पूरे क्षेत्र में सांप डसने से केवल 10 फीसदी ही मरीज अस्पतालों में आते हैं। इनमें भी कुछ ज्यादा सिरियस होने की दशा में मर जाते हैं। अस्पताल में सांप काटे के जितने मरीज आते हैं उनमें 6 फ़ीसदी मामलों में ही काटने वाले सांपों की पहचान हो पाती है। सांपों से संदर्भित एक सर्वेक्षण के अनुसार सांप जिन अंगों पर दांत गड़ाते हैं उनमें टांग पर 72 फीसदी व हाथ पर 25 फ़ीसदी मामले आए हैं। सांप के काटने का समय 68 फ़ीसदी अंधेरे व 32 फ़ीसदी घटनाए दिन के समय दर्ज की गई हैं। दुद्धी क्षेत्र में ज्यादातर मौतें करैत, वाइपर, कोबरा (नाग) के काटने से होती है। नाग के काटने पर यदि एंटीस्नैक वेनम का टीका समय पर ना मिले तो मरीज की मौत हो जाती है। नाग के विष का असर तंत्रिका तंत्र पर होता है और शरीर को लकवा मार जाता है। सर्पदंश की सबसे ज्यादा घटनाएं बरसात के मौसम में होती हैं। सांप सबसे ज्यादा बरसात में ही बाहर निकलते हैं और मौत बनकर जमीन पर रेंगते हैं।
इस बाबत केंद्र अधीक्षक डॉ शाह आलम अंसारी ने बताया कि सर्पदंश जागरूकता अभियान के तहत आशाओं, एएनएम व ग्राम प्रधान को “अवेयरनेस प्रोगाम फॉर स्नेक बाइट इन रूरल एरियाज” के तहत जानकारी दी गई है। प्रत्येक आशाओं और एएनएम के पास एक स्नेक बाइट किट है। जिसमें कटे स्थान को फिक्स करने हेतु स्केल, फर्स्ट एड, पहचान पर्ची व निर्देशिका शामिल है।

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