टुकड़ो में बारिश-कहीं भींगा मन, कहीं तरसा आंगन

(डेमो पिक)
ठुमक-ठुमक कब तक चलेगा मानसून
हाथीनाला के जंगल में कब नाचेंगे मोर-मोरनी, कहाँ दुबक गया मानसून
दुद्धी, सोनभद्र। दुद्धी में कब आएगा मानसून, कब लोगों को मिलगी उमस भरी गर्मी से राहत। किसानों के हल में कब नथेंगे बैल। कब जगह-जगह धान की नर्सरी देखने को मिलेगी। दुद्धी क्षेत्र में मानसून की देरी इस साल फिर तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले दो-तीन दिन में शाम के वक्त हल्की-फुल्की बारिश न किसानों और न ही आमजन को रास आ रही है। पिछले साल बारिश न होने से टूटा किसान अपनी नर्सरी के लिए ज्यादा नहीं तो कम से कम सामान्य बारिश का इंतजार कर रहा है। पिछले साल बारिश की बेरुखी के कारण धान की पीली पड़ी नर्सरियों को घरेलू जानवरों के चारा रूप में प्रयोग करना जैसी घटना को याद कर किसान सिहर उठता है। ठुमक-ठुमक कर जमीन को हल्की भिगोंने वाली बारिश खुलते ही उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल नजर आ रहे हैं। पूर्ववर्ती वर्षों में 15 जून से मानसून आने व बारिश होने की परंपरा रही है। इस वर्ष जबरदस्त गर्मी व लू चलने के बावजूद मानसून एक सप्ताह बीत गया मगर दुद्धी क्षेत्र में टुकड़ों में बारिश हो रही है। अब तक तो एक सप्ताह की बारिश में वनाच्छादित हाथीनाला के घनघोर जंगलों से गुजरते समय लबे रोड मोर-मोरनियों के नृत्य व आवाज सुनाई देने लगती थी। क्षेत्रीय किसान झमाझम बारिश होने का इंतजार कर रहे हैं। पिछले दो-तीन दिनों में अनियमित बारिश हुई है जो धान की नर्सरी के लिए उपयुक्त नहीं है। मानसून में देरी से खेती-किसानी पर इसका प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि, इससे खरीफ फसलों, जैसे धान की बुवाई में देरी होगी। इसका दुष्प्रभाव खरीफ फसलों की देर से कटाई और अगली (रबी) फसलों की बुवाई के बीच का अंतर कम हो जाएगा।



