चेक बाउंस होने पर अदालत ने सुनाई एक वर्ष की सजा

सोनभद्र। चेक बाउंस होने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने एक व्यक्ति को एक साल की सजा व ढाई लाख का अर्थदंड सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने की दशा में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। राबटर्सगंज कोतवाली क्षेत्र के चुर्क निवासी धीरेंद्र कुमार ने घर के कार्य के लिए अपने पड़ोसी दिलीप कुमार से एक लाख 65 हजार उधार लिया था। दिलीप का दावा था कि धीरेंद्र ने उसे छह माह में लौटा देने का वायदा किया था लेकिन उसने तय समय पर रकम की अदायगी नहीं की तो तकादा किया। इसके बाद धीरेंद्र की तरफ से एक लाख 65 हजार का नगर सहकारी बैंक एक चेक उसे सौंपा गया। उसे सिंडीकेट बैंक स्थिति शाखा में उसने लगाया तो चेक जारीकर्ता के खाते में रकम कम होने और संबंधित चेक के भुगतान पर रोक लगी होने की जानकारी देते हुए, चेक को अनादरित (बाउंस) कर दिया गया।
चेक बाउंस हेने के बाद भी, धीरेंद्र ने ली गई रकम वापस नहीं की तो दिलीप ने अधिवक्ता के जरिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में धारा 138 पराक्रम्य लिखत अधिनियम के तहत केस दायर कर चेक जारी कर्ता को दंडित करने और ली गई रकम को वापस कराने की गुहार लगाई। लगभग आठ साल तक चली सुनवाई के बाद, सीजेएम अचल प्रताप सिंह की अदालत ने, धीरेंद्र को चेक जारी करने के लिए दोषी पाया। उसे, वादी से लिए गए धनराशि के भुगतान का उत्तरदायी ठहराते हुए, एक वर्ष के कारावास और ढाई लाख के अर्थदंड से दंडित किया। आदेश दिया गया कि अर्थदंड की धनराशि जमा होने के बाद, उसमें से एक लाख 75 हजार वादी यानी दिलीप को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे। वहीं, शेष 75 हजार की रकम राज्य सरकार के पक्ष में अदा की जाएगी।



