सोनभद्र

हथिया नक्षत्र की बारिश ने धान की खेती से चूकने वाले किसानों को गेंहू की फसल के लिए जगाई आस

(फोटो कैप्सन-दुद्धी के धनौरा गांव में बारिश के बाद अपनी धान की फसल को निहारता मनीष तिवारी)

हस्त नक्षत्र की बारिश से धान की फसल को मिला संजीवनी, किसानों के मुरझाए चेहरे खिले

दुद्धी क्षेत्र में तिल, उर्द, मक्का व सावाँ की पकी या कटकर खलिहान में पहुंच चुकी फसल को होगा नुकसान

एम.एस.अंसारी (कृषि स्नातकोत्तर)

दुद्धी, सोनभद्र। “हस्त बरस चित्रा मंडराय, घर बैठे किसान सुख पाय” प्रसिद्ध कवि घाघ की यह महत्वपूर्ण कहावत तहसील क्षेत्र में रविवार की रात से शुरू हस्त नक्षत्र की बारिश ने किसानों की उम्मीद को एक बार फिर से जीवंत कर दिया है। 28 सितंबर से चढ़ी हथिया नक्षत्र 11 अक्टूबर तक अपने बारिश का जलवा बिखेरेगी। इसके अलावा घाघ की ही दूसरी कहावत “हथिया पोंछि डोलावे, किसान घर बैठे गेंहूँ पावे” मतलब पानी के अभाव में खरीफ की फसल धान की खेती से चूकने वाले किसानों को भी अब रबी की फसल गेंहूँ, सरसौं, जौ, चना, मसूर, अलसी की फसल की होने की उम्मीदें बलवती होती नजर आ रही हैं। बारिश से नदी, नाले, तालाब, बंधी, हैडर, बाउली कुएं आदि जलस्रोत भरेंगे जो सिंचाई के काम आयेगें।

बायोवेद रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर टेक्नालॉजी एंड साइंसेस प्रयागराज के असिस्टेंट प्रोफेसर कृष्णमोहन कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि खाली पड़े खेतों में हथिया नक्षत्र की इस बारिश के साथ किसान अब सरसों और गेंहू जैसी दो फसल कर सकते हैं। अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में कम दिन की अवधि वाला सरसों की बुवाई कर दिया जाय तो दिसंबर में जीरो टिलेज के तहत सीड ड्रिल से डाईरेक्ट गेंहू की बुवाई भी आसानी से हो जाएगी। वहीं दूसरी ओर देखा जाय तो दुद्धी क्षेत्र में तिल, मक्का और उर्द की पकी या कटकर खलिहान में पहुंच चुकी फसल को नुकसान भी होने की संभावना है।

खरीफ की फसल धान की खेती पर गौर करें तो 90 से 100 दिन की अवधि तक पैदा होने वाले मोटा या हलकन धान मौजूदा समय तक फूट चुके हैं। 120 से 150 दिन तक होने वाले पतला या गढूवन धान की प्रजाति इन दिनों फूटने के कगार पर है। इस वक्त धान की फसल को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। ऐसे समय में ऐन वक्त पर बारिश होने से फसलों को संजीवनी प्रदान हुआ है। वहीं रोग से पीली हो रही पत्तियां एक बार फिर से खेतों में हरियाली रुख अख्तियार कर लहराने लगेंगी, जिससे किसानों के चेहरे खिल गए हैं और उनके फसल होने की उम्मीद जग गई है।
मौसम की बेरुखी के चलते अबकी बार बारिश न होने की स्थिति में इलाके के गांवों में सत्तर प्रतिशत तक किसानों की खेतों में धान की रोपाई नहीं हो पाई है। कुछ किसान बोरिंग, ट्यूबवेल पंपिंग सेट के सहारे धान के बीज खेतों में डालकर तैयार होने पर किसी तरह रोपाई करके बारिश का इंतजार में लगे रहे। बीच-बीच में थोड़ी बहुत बारिश तो कभी निजी साधनों के सहारे फसलों को अब तक बचाते चले आ रहे थे। लेकिन धान गाभने के वक्त एक बार फिर से फसल सूखने लगी थी। किसान जहां बादलों को निहार रहे थे वहीं उनके माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही थी। इसी बीच एक बार पुनः बारिश होने से उनकी उम्मीदें जीवंत हो गई है। फसलों को बारिश ने संजीवनी का काम किया है। वहीं फसलों में लगे रोग भी समाप्त होने लगेंगे।
कटौली निवासी सीमांत किसान व पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड, धनौरा के शिवदास तिवारी, दीघुल के भगवान दास यादव, डूमरडीहा के ओमप्रकाश कुशवाहा, जपला निवासी कमलेश कमल आदि कहते हैं कि इस समय धान की फसलदुग्धावस्था में है ऐसे समय में धान की फसल को पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है। ऐसे वक्त पर बारिश का होना धान की खेती के लिए सोने पर सुहागा है। इन किसानों का कहना है कि एक दो बारिश इसी तरह और हो जाएगी तो धान की फसल खेतों में लहरा उठेगी। दूसरी ओर इस बारिश से धान की खेती से चूके किसान चैती की फसल को लेकर पूरी तरह आशान्वित हो जाएंगे।

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