सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 811वें उर्स पर सजी मनकबत की महफ़िल, हुई तकरीर

सालाना उर्स में हर साल चढ़ती है मुल्क के वजीरे आला की चादर
प्रधानमंत्री मोदी ने 9वीं बार पेश की ख्वाजा गरीब नवाज को चादर-मौ.मंसूर
दुद्धी, सोनभद्र (एम.एस.अंसारी)। प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 811वें सालाना उर्स (पुण्यतिथि) पर रविवार को दुल्हन की तरह सजी दुद्धी जामा मस्जिद में महफिले मनकबत और मिलाद शरीफ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। अखाड़ा कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में दुद्धी कस्बे सहित दीघुल, निमियाडीह, खजूरी, टेढ़ा, डुमरडीहा आदि गांवों के ख्वाजा के दीवाने व अकीदतमंद लोग शामिल हुए। महफिले मिलाद का आगाज कुरान शरीफ के तिलावत से हुई। रिज्वानुद्दीन लड्डन ने ख्वाजा गरीब नवाज की शान में मनकबत पेश करते हुए पढ़ा कि “क्या तराना है हिन्दलवली का, क्या घराना है हिन्दलवली का, जिनके तलवों को चूमे फरिश्ते, ऐसे नाना हैं हिन्दलवली का। जामिया रिज्विया मदरसा दीघुल के मौलाना मंसूर ने बताया कि ख्वाज़ा के दरगाह पर पहली चादर परंपरागत रूप से अपने देश के प्रधानमंत्री का चढ़ाया जाता है। पिछले 8 साल की भांति 9 वर्ष भी पीएम मोदी ने ट्विटर पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा के अल्पसंख्यक विंग के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के साथ चादर पेश करने की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने कहा, “अजमेर शरीफ दरगाह में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स पर पेश की जाने वाली चादर सौंपी।” तकरीर में बताया कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, छठी शताब्दी के एक महान सूफी संत, एक इस्लामी उपदेशक, धार्मिक विद्वान, दार्शनिक और रहस्यवादी थे जो सभी के द्वारा पूजनीय हैं। उन्हें ‘गरीब नवाज’ (गरीबों का संरक्षक) भी कहा जाता है।
शायर गुलाम गौस ने मनकबत पेश करते हुए पढ़ा कि “कुर्सी पर कोई भी बैठे राजा तो मेरा ख्वाजा है। जामा मस्जिद दीघुल के पेशिमाम मौलाना जियाउल मोबिन ने अपनी रूहानी तकरीर में कहा कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जिन्हें ख्वाजा गरीब नवाज के नाम से भी जाना जाता है, चिश्ती संप्रदाय के एक सूफी संत थे। उन्हें पैगंबर मुहम्मद के प्रत्यक्ष वंशज के रूप में जाना जाता है। सिस्तान (वर्तमान पूर्वी ईरान और दक्षिणी अफगानिस्तान) में जन्मे, उन्होंने लाहौर से दिल्ली तक की यात्रा की और अंत में अजमेर में बस गए। अजमेर में उनका मकबरा, अजमेर शरीफ दरगाह, दुनिया के सबसे पवित्र इस्लामी धार्मिक स्थलों में से एक है। दुनियां भर से मुसलमान हर साल दरगाह पर जियारत करने आते हैं। केवल मुस्लिम ही नहीं, विभिन्न धर्मों के लोग भी साल भर दरगाह पर आते हैं। अंत में मुल्क की तरक्की, आपसी सौहार्द, मुहब्बत और भाईचारे की रूहानी दुआख्वानी की गई। इस अवसर पर जामा मस्जिद दुद्धी के पेशिमाम हाफिज सईद अनवर, कादरिया गर्ल्स कॉलेज के प्रभारी मौ.गुलाम सरवर, हाफिज जहांगीर, हाजी फैजुल्लाह, फतेहमुहम्मद खान, जोखन खलीफा, शरफुद्दीन खान, जहीर खान, मैनुद्दीन खलीफा, सरफराज साह, फिरोज, अजमेतुल्लाह खान, पिंटू, मुन्नन हवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कस्बा इंचार्ज संजय सिंह अपने हमराहियों संग जामा मस्जिद के पास चक्रमण करते रहे।



