सोनभद्र

नफरत का जाम मुझसे तो ढाला न जाएगा………..

कवियों की रचनाएं देती हैं समाज को नई दिशाएं-एसडीएम शैलेन्द्र मिश्रा

प्रभा बिंदु मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वाधान में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न

रेनुकूट/दुद्धी, सोनभद्र। प्रभा बिंदु मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वाधान में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर श्री राधा कृष्ण मंदिर मूर्धवा के सत्संग भवन में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी दुद्धी शैलेंद्र मिश्रा व विशिष्ट अतिथि के रूप में अजय शेखर प्रख्यात साहित्यकार सोनभद्र मौजूद रहे। कार्यक्रम में सर्वप्रथम मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि सहित आमंत्रित कविगण को माल्यार्पण व अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि एसडीएम शैलेन्द्र मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से समाज को नई दिशा मिलती है। कवियों के सुनाई गई रचनाओं पर अगर एक आदमी भी अमल कर ले तो कार्यक्रम की सार्थकता मानी जाएगी। कार्यक्रम में सोनभद्र के आदिवासियों का जीवन चित्रण अपनी कविता के माध्यम से बयान करते हुए कहा कि जंगली के घर बीछ गईस कारखानन के जाल, जंगली जंगली रह गईस बाकी मालामाल, फजीहत गहमरी ने मन मीरा सूर तुलसी में बसाने लगा हूं, पद भक्ति के रागों को गुनगुनाने लगा हूं, जब से सुना हो जलोटा को जसलीन मिल गई, सब काम-धाम छोड़ भजन गाने लगा हुँ, कुंवर सिंह कुंवर ने कहा मैं अपनी कविता में गुफ्तगू बेबसों के मसलों पर, रात में आलीशान बंगलों पर, मेरे आंगन में अब नहीं आती, वह जो बैठी है धूप महलों पर, जनपद के वरिष्ठ कवि जगदीश मंत्री ने निर्बल के बल बनल जाई हो, ई धरती स्वर्ग बनी जाई हो, भूषण त्यागी ने एक मुहिम सक्षम भारत का चला सखे, जिससे भारतवंशियों का हवाला सखे, हंसते-हंसते जो सरहद पर झूल गए, उनकी भी खातिर एक दीप जला सखे, संचालक नागेश सांडिल्य ने कल ही सुबह जैसे मैंने खोला अपना गेट, सामने बैठा एक नौजवान अप टू डेट, कुछ अजीब नजर आ रहा था, पास जाकर देखा तो साबुन खा रहा था, कवि यथार्थ विष्णु ने अल्मुनियम कोयला बिजली गिट्टी से हम आते हैं, पर्वत घाटी जंगल झोपड़पट्टी से हम आते हैं, जहां रेणुका सोन की बाहों में आलिंगन करते हैं, सोनभद्र के सोंधी-सोंधी मिट्टी से हम आते हैं, लखनऊ से पधारे डॉक्टर सुरेश ने इस नगर हैं, उस नगर हैं, पांव में बांधे सफर हैं, हैं थके हारे नींद के मारे, हम तो ठहरे यार बंजारे, कवयित्री शालिनी श्रीवास्तव ने तूने देर अपनाने में की, मैंने मन दिया किसी और को, तेरे साथ चलने का था कभी, वो वचन दिया किसी और को, कवि पंकज प्रखर ने उठो जवानों जगना होगा, सोया स्वाभिमान जगे, पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण पूरा हिंदुस्तान जगे,
गोरखपुर से पधारे कवि मनमोहन मिश्र ने नफरत का जाम मुझसे तो ढाला न जाएगा, यह काम मेरे दिल से संभाला न जाएगा, बेकार कर रहा है यूं नाकाम कोशिशें, मिलने कभी सियाह से उजाला न जाएगा जैसी रचना सुनकर गोरखपुर से पधारे कवि मनमोहन मिश्रा ने श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।

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