सोनभद्र

आरंगपानी में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया रानी दुर्गावती का शहादत दिवस

“वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की प्रतीक थीं रानी दुर्गावती”

म्योरपुर/सोनभद्र (विकास अग्रहरि)

म्योरपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत आरंगपानी के तेलिया गडई टोले में रानी दुर्गावती का शहादत दिवस मनाया गया ,जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में रामरति पोया गोड़ एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में गिरधर गोपाल ,हरि प्रसाद सलबंधी मंत्री जी उपस्थित रहे ,एवं कार्यक्रम का संचालन युवा समाजसेवी एवं सर्व समाज में लोकप्रिय, युवा हृदय सम्राट राजू कुमार गुप्त ने किया एवं कार्यक्रम संयोजक रानी दुर्गावती समिति के अध्यक्ष सुलेखा देवी उपस्थित रही ,कार्यक्रम में मुख्य अतिथि द्वारा रानी दुर्गावती जी के जीवन चित्रण पर विस्तार से वर्णन किया गया ,उन्होंने अंग्रेजों से लड़ते हुए अपने देश के लिए शहादत दी ,लेकिन अंग्रेजो की अधीनता स्वीकार नहीं की, कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि गिरधर गोपाल ने भी उनके जीवन चरित्र पर विस्तार से वर्णन किया ,एवं समाज में एक आदर्श स्थापित करने का आह्वान किया ,कार्यक्रम की संचालन कर रहे हैं युवा समाजसेवी राजू कुमार गुप्त ने बताया कि रानी दुर्गावती जी कैसे अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते अंतिम क्षणों तक लड़ाई लड़ी ,जिससे हमारा देश को स्वतंत्रता दिलाने में कामयाबी प्राप्त हुई ,अंतिम क्षणों में भी उन्होंने युद्ध को ही चुना, और लड़ती रही, रानी दुर्गावती की गोंडवाना साम्राज्य की एक महान वीरांगना और साहसी महारानी थी ,चंदेल वंश में जन्मी इस वीरांगना ने मुगलों के अधीनता स्वीकार करने की बजाय युद्ध भूमि में प्राण निछावर कर दिए, उनके शौर्य बुद्धिमत्ता और बलिदान की गाथा आज भी भारतीय इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है ,उनका जन्म 5 अक्टूबर 1524 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित ऐतिहासिक कालिंजर किले में हुआ था, उनके पिता चंदेल राजा कीरत राय थे, दुर्गा अष्टमी के दिन जन्म होने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया ,बचपन से ही उन्होंने तलवारबाजी घुड़सवारी और तीरंदाजी में गहरी रुची थी, 1542 में 18 वर्ष की आयु में उनका विवाह गोड़ राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ, कुछ दिनों में उनके पति की आकस्मिक मृत्यु हो गई ,और उनका एक 3 वर्ष का पुत्र वीर नारायण था रानी ने विचलित होने के बजाय अपने को 3 वर्षीय पुत्र को गद्दी पर बैठाकर खुद राज्य की बागडोर संभाली और कुशलता पूर्वक शासन चलाया, रानी दुर्गावती एक अत्यंत कुशल शासक थी उनके शासनकाल में गोंडवाना राज्य बेहद समृद्ध और खुशहाल था, जब मुग़ल सम्राट अकबर ने मलवा पर कब्जा कर लिया तो उसकी सीमाएं गोंडवाना से मिलने में लगी 1564 में अकबर के सेनापति अशफ खान ने एक विशाल सेना के साथ गोंडवाना पर आक्रमण कर दिया ,लेकिन रानी दुर्गावती ने पीछे हटने के बजाय युद्ध लड़ने की चुना और युद्ध लड़ते-लड़ते शहीद हुए , रानी दुर्गावती की आंख में एक तीर लगा और वह गंभीर रूप से घायल हो गई घायल होने के बावजूद उन्होंने मुगलों के सामने समर्पण नहीं किया और 24 जून 1564 को दुश्मनों के हाथों बंदी बनने से बचने के लिए उन्होंने अपनी ही कतार से अपनी छाती घोप कर अपना बलिदान दे दिया, आज भी उन्हें अपने जीवन में उनका आदर्श को उतरना है और अपने समाज को एक सशक्त दिशा दिखाने है कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुलेखा देवी गोड , हरि केश्वर , सुखलाल गोड़ , राम बिनय , लखन जी, भगवान दास जी, पार्वती देवी, रानी देवी, अमरावती देवी, शांति देवी, फूल बस देवी, मान मति देवी, रेनू गुप्ता, राधा देवी, कुंती देवी, समिला देवी, उत्कर्ष गुप्ता,एवं कई दर्जन लोग रानी दुर्गावती जी के शहादत दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए,

Vikash Agrahari

विकास अग्रहरी सोनभद्र म्योरपुर निवासी है। कम समय मे विकास अग्रहरी आज जिले की पत्रकारिता मे एक जाना पहचाना नाम है।

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