कॉर्पोरेट संपत्ति पर टैक्स लगाकर बढ़ाया जाए जनकल्याण बजट: एआईपीएफ
आदिवासी धर्म कोड लागू करने और सामाजिक अधिकारों की मांग को लेकर जारी है रोजगार-सामाजिक अधिकार यात्रा
म्योरपुर /सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
दलितों और आदिवासियों के विकास के लिए जारी सब प्लान बजट तथा जनकल्याण योजनाओं के मद में बढ़ोतरी हेतु बड़े कॉर्पोरेट घरानों की संपत्ति पर टैक्स लगाने की मांग रोजगार-सामाजिक अधिकार यात्रा के दौरान प्रमुखता से उठाई जा रही है। जनगणना में आदिवासी धर्म कोड लागू करने और आठ सूत्रीय मांगों को लेकर चल रही यात्रा के तहत खैराही, कुसम्हा, गंभीरपुर, आश्रम रनटोला समेत विभिन्न गांवों में संपर्क एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इसी क्रम में बभनी गांव में आयोजित खरवार समाज की बैठक में ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (एआईपीएफ) के जिला सचिव इंद्रदेव खरवार ने जनगणना में आदिवासी धर्म कोड शामिल करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है, जिसे संरक्षित करने के लिए धर्म कोड का प्रावधान जरूरी है।
संवाद कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश में संसाधनों की कमी नहीं है। यदि बड़े कॉर्पोरेट घरानों की संपत्ति पर मात्र दो प्रतिशत टैक्स लगाया जाए तो देश का मौजूदा बजट लगभग दोगुना हो सकता है। इससे रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन, आवासीय भूमि जैसे बुनियादी अधिकारों को मजबूत किया जा सकता है तथा दलित और आदिवासी समुदायों के विकास बजट में भी पर्याप्त वृद्धि संभव है।
वक्ताओं ने बताया कि आजादी से पहले और वर्ष 1961 तक जनगणना में आदिवासी धर्म के लिए अलग कॉलम मौजूद था, जिसे बाद में समाप्त कर दिया गया। उनका कहना था कि आदिवासी समाज की अपनी परंपराएं, संस्कृति, रीति-रिवाज, भाषा और जीवन शैली है, जिसकी विशिष्ट पहचान को सुरक्षित रखने के लिए जनगणना में आदिवासी धर्म कोड को शामिल किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में एआईपीएफ के जिला संयोजक कृपा शंकर पनिका, सविता गोंड, रूबी सिंह गोंड, राजेंद्र प्रसाद गोंड, देवकुमार खरवार, सुगवंती गोंड, मंगरु प्रसाद श्याम, जवाहर खरवार, रामचंद्र पटेल, अंतलाल खरवार, राजकुमार खरवार, गंभीरा गोंड, ललित गोंड, समरजीत गोंड सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।



