मुर गुड्डी पहाड़ी बन रही पर्यटन का नया केंद्र, सूर्योदय-सूर्यास्त के नजारे खींच रहे पर्यटकों को

कनहर जलाशय, घने जंगल और विशाल प्राकृतिक चट्टानें बढ़ा रही आकर्षण; सुविधाओं के अभाव के बावजूद बढ़ रही पर्यटकों की आमद

म्योरपुर /सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
प्रकृति की गोद में बसा म्योरपुर ब्लॉक का मधुबन क्षेत्र इन दिनों अपने अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य के कारण तेजी से पर्यटकों की पसंद बनता जा रहा है। यहां स्थित मुर गुड्डी पहाड़ी सूर्योदय और सूर्यास्त के मनमोहक दृश्यों के लिए विशेष पहचान बना रही है। सुबह की पहली किरणों से सुनहरी होती चट्टानें और शाम के समय बदलते आसमानी रंग पर्यटकों को रोमांचित कर रहे हैं।मुर गुड्डी पहाड़ी जिले की सबसे विशाल प्राकृतिक चट्टानों में गिनी जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इसकी विशाल चट्टान पर एक साथ हजारों लोग बैठ सकते हैं। पहाड़ी की ऊंचाई से दूर-दूर तक फैले जंगल, पर्वत श्रृंखलाएं और कनहर बांध का विशाल जलाशय स्पष्ट दिखाई देता है, जो हर मौसम में अलग-अलग प्राकृतिक छटा बिखेरता है।
पहाड़ी के आसपास फैला राजा चंदौल का जंगल और मृगा रानी पहाड़ क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा को समृद्ध बनाते हैं। यहां राष्ट्रीय पक्षी मोर के अलावा हिरण, खरगोश और सेही जैसे वन्यजीव भी देखे जा सकते हैं। शांत वातावरण और हरियाली पर्यटकों को शहर की भागदौड़ से दूर सुकून का अनुभव कराती है।रविवार को आईआईटी कानपुर के शोधार्थी सयंतन दास, युवा समाजसेवी एवं पर्यावरण चिंतक आशीष गुप्ता तथा नीतीश मौर्य ने पहाड़ी का भ्रमण कर इसे पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त बताया। उल्लेखनीय है कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव गोंड ने भी इस स्थल को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का आश्वासन दिया था।ग्रामीण रामकेश, रामरतन और रामनारायण बताते हैं कि पहले यह स्थान केवल स्थानीय लोगों तक सीमित था, लेकिन सोशल मीडिया और प्रचार-प्रसार के कारण अब दूर-दराज से भी पर्यटक पहुंचने लगे हैं। विशेष रूप से युवा और फोटोग्राफी प्रेमी सूर्योदय व सूर्यास्त के समय यहां बड़ी संख्या में आते हैं।
हालांकि पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद यहां पेयजल, सड़क, सुरक्षा व्यवस्था और दिशा-सूचक संकेतकों जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन आवश्यक सुविधाएं विकसित करे तो मुर गुड्डी पहाड़ी सोनभद्र का प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र बन सकती है।
पर्यटन से बढ़ेंगे रोजगार, संरक्षण भी जरूरी
मुर गुड्डी पहाड़ी के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गाइड सेवा, स्थानीय उत्पादों की बिक्री, होम-स्टे और छोटे भोजनालयों के माध्यम से गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
पर्यावरण चिंतक आशीष गुप्ता का कहना है कि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त रखने, स्वच्छता बनाए रखने और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों तथा प्रशासन को संयुक्त रूप से प्रयास करना होगा।
प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और मनोरम दृश्यों से भरपूर मुर गुड्डी पहाड़ी को यदि योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो यह सोनभद्र ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकती है।



