नारायण साहित्य शाला भारत ट्रस्ट द्वारा कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह संपन्न

दुद्धी/सोनभद्र (मदन मोहन तिवारी) शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर साहित्य से जनजागृति एवं विकास की अवधारणा पर चल रही, बारह प्रादेशिक मंचों के द्वारा साहित्य की अलख जगा रही। और नारायण साहित्य शाला प्रकाशन दिल्ली के द्वारा साहित्य को प्रकाशित कर रही नारायण साहित्य शाला भारत ट्रस्ट की दुद्धी सोनभद्र उ प्र इकाई द्वारा कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन पतरिहा गांव के शिव मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान शंकर के अभिषेक श्रृंगार पूजन दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
जिसमें मुख्य अतिथि ब्लाक प्रमुख रंजना चौधरी जी, राजन चौधरी जी (रिटायर जज), जी ने समाज में सामाजिक संचेतना के विकास हेतु संस्था के प्रयास को सराहा, संस्थान अध्यक्षा श्रीमती अर्चना त्रिपाठी जी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की-
शारदे शारदे शारदे मातु हे शारदे।
तार दे तार दे भक्त को तार दे।
तत्पश्चात आदरणीय अध्यक्षा जी ने नारी सशक्तिकरण की बात और संस्कार की बात रखते हुए इस कविता को प्रस्तुत किया
राम पीछे तुम्हारे चलूंगी।
पलामू गढ़वा से आए हुए झारखंड मंच के संरक्षक ज्ञानंद चौबे जी ने दो रचनाएं प्रस्तुत की
सज्जन पर जब-जब घात हुआ।
तब-तब हरि का अवतार हुआ।
प्रकाशन प्रमुख हरिनारायण ने बहुत ही गजब की तनाव मुक्त करने वाली प्रस्तुत किया
जीवन में मुस्कुराहट आवश्यक है।
अंतर में गुदगुदाहट आवश्यक है।।
बहुत सरल है इस कठिन मत बनाओ,
अंदर से चुलबुलाहट आवश्यक है।
रचना को सुन मुग्ध होकर सभी श्रोता मंत्र मुग्ध हुए
इस कार्यक्रम में प्रमुख भूमिका में संस्थापक धर्मगुरु पं० राम जस त्रिपाठी नारायण जी के साथ दुद्धी इकाई के संरक्षक श्री सुदर्शन कुमार मिश्रा जी , संस्थान के ट्रस्टी विशाल कुमार मिश्रा जी एवं झारखंड मंच के संरक्षक श्री ज्ञानंद चौबे जी के साथ मंदिर पुरोहित श्री राजू मिश्रा जी,मुख्य रूप से उपस्थित रहे। साथ ही क्षेत्रीय साहित्यकार श्री सच्चिदानंद चौबे, दयानंद चौबे , जितेंद्र चौबे, सुरेश चौबे, राणा प्रसाद मिश्रा, पंकज चौबे, सुरेंद्रनाथ मिश्र, श्याम बिहारी मिश्र, पप्पू कुमार चौबे, सुरेश चौबे, विशाल कुमार मिश्र, विकास कुमार मिश्र, प्रकाश चंद्र चौबे, अधिवक्ता राकेश कुमार तिवारी जी के साथ महिला उपस्थिति श्रीमती संध्या मिश्रा, कंचन मिश्रा जी उपस्थित रहे। ये अपनी प्रस्तुति देकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई एवं सम्मानित हुए। इस कार्यक्रम से ग्रामीण अंचल में धार्मिक सामाजिक राष्ट्रीय एकता की संचेतना का विकास हुआ।
सभी को संस्था के *संस्थापक धर्मगुरु पं रामजस त्रिपाठी ‘नारायण’ जी द्वारा रचित मृत्युंजय चालीसा, अंगवस्त्र, सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया*। संस्था के बैनर तले प्रत्येक शनिवार को सांस्कृतिक साहित्यिक कार्यक्रम करने की अपील की गई जिसको सभी समिति के सदस्यों ने स्वीकार किया ।



