35 वर्षों से अधूरा पड़ा काशीकुड़ बंधी को पूरा कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन

1990 में आठ सौ मीटर लंबी बंधी निर्माण की बीच धारा छोड़े जाने से किसान है मायूस
म्योरपुर ब्लॉक के आरंगपानी के काशीकुड में तीन सौ किसानों के एक हजार विधा जमीन होनी थी सिंचित
म्योरपुर/ सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
म्योरपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत आरंगपानी के सौ फीसदी आदिवासी बाहुल्य काशीकुड में पिछले 35 वर्षों से अधूरा पड़े काशीकुड़ बंधी को पूरा कर किसानों के खेत को सिंचाई युक्त बनाने की मांग को लेकर शनिवार को ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया और अधूरे पड़े बंधी को पूरा कराने की मांग की। राम लखन,बजरंगी,राम रति पोया, राम कुमार ने बताया कि 1990 में सिंचाई विभाग से तीन सौ किसानों के एक हजार विघा जमीन सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया था और दो किमी लंबी नहर बनाने की योजना थी जिससे किसान खेती के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सके और गरीबी मिटा कर आदिवासियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया जा सके।उपरोक्त ग्रामीणों ने बताया कि मामले को लेकर कई बार जिला मुख्यालय से लिखित मांग की गई लेकिन कोई सुनाई नहीं हो रही है।बताया कि बंधी निर्माण कार्य 90 फीसदी पूरा भी हो चुका है नाले की मुख्य धारा जहां से पानी रुकना है उसे अधूरा छोड़ दिया गया है। और नहर भी नहीं बना है। आदिवासी ग्रामीणों का कहना है कि हमरा जिला आदिवासी बाहुल्य माना गया है l लेकिन हम आदिवासी सिंचाई के अभाव में खेती वर्षा पर आधारित ही कर पाते है।पर्याप्त जमीन होकर भी हम साल भर का उपज नहीं ले पाते और मजदूरी करने पर मजबूर है।बंधी के पानी रुकेगा तो हम खेतों की सिंचाई कर अच्छी पैदावार कर अन्य लोगों का पेट भी भर सकते है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए अधूरे पड़े बंधी को पूरा कराने की मांग की है।कहा है कि बंधी का निर्माण पूरा नहीं कराया गया तो हम लोग ब्लॉक का घेराव करने पर मजबूर होंगे।प्रदर्शन करने वालों में हरि प्रसाद सालबंदी, राजू गुप्ता,राम नवाज,राम पाल खरवार, राम जी सोनी, कुसुम, कौशल्या, राम लोचन धरकर, आदि मौजूद रहे।


