लगातार 40वें साल दुद्धी में जली कौमी एकता की मशाल
—दर रात तक चले कवि सम्मेलन व मुशायरे में आती रही गुदगुदी, तो छूती रही कश

दुद्धी(सोनभद्र) मदनमोहन तिवारी)कौमी एकता समिति के तत्वावधान में स्थानीय तहसील प्रांगण में मंगलवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यमंत्री संजीव सिंह गोंड़, विशिष्ट अतिथि के रूप में अनुसूचित जनजाति आयोग उपाध्यक्ष जीतसिंह खरवार, नगर पालिका चेयरमैन रूबी प्रसाद, नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन, म्योरपुर ब्लाक प्रमुख मानसिंह गोंड़ रहे। समारोह अध्यक्ष पूर्व सांसद रामशकल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र का अनावरण, पुष्पअर्पण व दीप प्रज्वलन कर किया गया। तत्पश्चात समिति द्वारा मुख्य अतिथि, समारोह अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथि के रुप में पधारे अतिथियों सहित आमंत्रित कविगण को माल्यार्पण, बैच अलंकरण व अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि संजीव सिंह गोंड़ ने कौमी एकता सप्ताह के अंतर्गत तहसील मुख्यालय पर आपसी सौहार्द के उद्देश्य आयोजित की जाने वाली इस परंपरा का निर्वहन करने वाली कमेटी को बधाई देते हुए कहा कि कवि सम्मेलन से समाज जागरूक होता है। इस कार्यक्रम को अनवरत जारी रखने की आवश्यकता है। प्रतापगढ़ से पधारी श्रृंगार रस की कवित्री प्रीति पांडेय ने स्वरताल छंद लेके सरस्वती वंदना से काव्य पाठ की शुरुआत की। इसके बाद मध्यप्रदेश के धार से आये हास्य कवि जानी बैरागी ने “बारूद लेकर बैठा है अमरूद की हाथ मे” प्रयागराज से हास्य कवि अखिलेश द्विवेदी ने “हृदय पर जो ऋण था चुकाना पड़ेगा’ प्रयागराज से पधारे हास्य व्यंग्य के कवि बिहारी लाल अम्बर ने चलते-चलते सड़क पर मैं जाम न हो जाऊं, कोई खास बात कहके मैं आम न हो जाऊं जैसी कई रचनाएँ सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी। बनारस से शायर इमरान बनारसी ने “माँ का दुआ लेकर आया हूं” सुनाया। जबकि प्रशांत बजरंगी ने” मैं इश्क भी लिखूं तो इंकलाब लिखा जाता है” सिंगरौली की कवियत्री विजय लक्ष्मी शुक्ला ने राष्ट्र हित की काव्य पाठ कर श्रोताओं को लुभाया। कार्यक्रम का संचालन आलोक अग्रहरि, अविनाश गुप्ता व काव्य संध्या का संचालन दमदार बनारसी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य संरक्षक रविन्द्र जायसवाल, अध्यक्ष रामलोचन तिवारी, डॉ केके चौरसिया, मदन मोहन तिवारी, देवेश मोहन, भीम जायसवाल, बालकृष्ण जायसवाल, सहित भारी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे।



