सोनभद्र

साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम की तरफ से विचार गोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन किया गया

शक्तिनगर/सोनभद्र साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम की तरफ से विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर विचार गोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिवप्रसाद जी,जिला प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रेणुकूट रहे। मुख्य अतिथि तथा उपस्थित विद्वानों कवियों का स्वागत करते हुए डॉ मानिक चंद पांडेय ने कहा कि आज का यह दिन अत्यंत विशेष है विश्व हिंदी दिवस की 2025 की थीम,, ,एकता एवं सांस्कृतिक गौरव की वैश्विक आगाज,, के महत्व को उद्घाटित करते हुए कहा कि, आज पूरी दुनिया में हिंदी ने अपने महत्व का लोगों को एहसास करवाया है। मुख्य अतिथि श्री शिव प्रसाद जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक आदान प्रदान के लिए हिंदी से उपयुक्त विश्व की कोई भाषा नहीं है। क्योंकि हिंदी में हम जो बोलते हैं वही लिखते भी हैं, जो प्रायः अन्य भाषाओं में देखने को नहीं मिलता है। मुख्य वक्ता श्री राजीव कुमार प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज खड़िया बाजार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, हिंदी का व्याकरण एवं उच्चारण इतना मजबूत है कि संपूर्ण विश्व आज हिंदी का कायल बना हुआ है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एनटीपीसी परिसर शक्ति नगर के डॉ छोटेलाल प्रसाद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी का विश्व स्तर पर ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार करना ही आज के दिन के इस आयोजन का मूल उद्देश्य है। विवेकानंद इंटर कॉलेज शक्ति नगर के वरिष्ठ हिंदी पर अध्यापक अनिल चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदी के माध्यम से संपूर्ण विश्व की लोगों को भारत की गौरवशाली अतीत एवं उनके कार्य क्षमता का ज्ञान करवाना ही आज के दिन का सबसे बड़ा उद्देश्य है। विवेकानंद विद्यालय के हिंदी अध्यापक सदस्य ने कहा कि हिंदी आज संपूर्ण विश्व में रोजगार की भाषा बन चुकी है। ज्योति कुमारी ने कहा कि हिंदी से हमारे संस्कार की सुगंध आती है ।हिंदी हमारी देशभक्ति की भाषा है, जो पूरी दुनिया को इस बात का आभास करवा रही है।
इस अवसर पर काव्य पाठ का भी आयोजन किया गया। जिसमें उपस्थित कवियों ने विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर अपनी एक से एक कविताएं सुन कर लोगों का मन मोह लिया।वरिष्ठ कवि मांहिर मिर्जापुरी ने अपनी कविता कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया
भाषाओं में श्रेष्ठ और महान है।
हिंदी एकता की पहचान है।।
अजीम शायर बाहर बनारसी ने हिंदी के सम्मान को कुछ इस अंदाज में बयां किया
जिस्म है रूहो जान है हिंदी
मेरा हिंदुस्तान है हिंदी
शेर कहता हूं बहर हिंदी में
क्योंकि मेरी जुबान है हिंदी।
युवा कवि सचिन मिश्रा ने हिंदी को कुछ इस रूप में लोगों के सामने पेश किया
हिंदी हमारी जान है।
हिंदी से ही हमारी पहचान है
हिंदी से ही यह हिंदुस्तान है
हिंदी हमारी जान है।
गवर्नमेंट इंटर कॉलेज शक्ति नगर की हिंदी प्राध्यापक, बृजेश पांडेय विभात अपनी काव्य प्रस्तुति इस प्रकार किया
हिंदुस्तान में रहते हैं बात हिंदी में करेंगे।
मातृभूमि पितृ भूमि का सदा सम्मान करेंगे।
पापा मम्मी की जगह माता-पिता ही कहेंगे।
काव्य गोष्ठी का संचालन कर रहे रमाकांत पांडेय ने अपनी कविता सुना कर लोगों का मन मोह लिया
करो हिंदी का सम्मान तुम्हें सम्मान देगी यह।
हरेगी मुश्किले सब जिंदगी आसान कर देगी है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ मानिक चंद पांडेय तथा धन्यवाद ज्ञापन विजय कुमार दुबे ने किया। इस कार्यक्रम में गुलाब सिंह बद्री प्रसाद मुकेश रेल सरवन कुमार डॉ रणवीर सिंह उदय नारायण मनोरमा संध्या कुमारी रूपा कुमारी कमरून निशा कौशिक कुमार सीताराम राज कृष्ण मिश्रा इत्यादि लोग उपस्थित रहे।

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