राम के वन जाते ही सुनी हो गयी अयोध्या नगरी

म्योरपुर/सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
म्योरपुर रामलीला मंचन के छठवे दिन राम बनवास का प्रसंग बड़े ही मनमोहक अंदाज में खेला गया
लीला की शुरुवात दशरथ दरबार से शुरू होता है राजा दशरथ गुरुदेव के पास जाकर राम को अयोध्या का राजा बनाने के लिये विचार विमर्श करते है गुरुदेव ने राजा दशरथ से कहा अब राम राज्य पाठ की जिम्मेदारी संभालने योग्य हो गए है राम का राज्य तिलक बिना देर किए कर देना चाहिए राम का राज्य तिलक की खबर पूरे अधोध्या में फैल जाती है कलुआडोम द्वारा पूरे नगरी में मनमोहक तरीके से साफ सफाई किया जाता है ।
राम के राज्य तिलक होने से देवताओ में खलबली मच जाती है देवता आपस मे कहते है जिस कार्य के लिये श्रीराम ने जन्म लिया है वह कार्य अधूरा रह जायेगा श्रीराम अगर राजा बन जाएंगे तो राक्षसों का अंत कौन करेगा
सभी देवता माता सरस्वती का आवाहन करते है तथा मंथरा के जीवा पर बैठ जाने का आग्रह करते है देवताओ के आग्रह पर माता सरस्वती मंथरा के जीवा पर बैठ जाती है मन्थरा केकई के पास जाकर केकई का मति को बदल देती है केकई से मन्थरा बोलती है तुम कोप भवन में चली जाओ राजा जब तुमसे पूछे तो तुम दो वर मांग लेना पहला भारत का राज्याभिषेक व राम को 14 वर्ष के लिये बनवास मन्थरा का बात मान केकई केकई कोप भवन में चली जाती है।
दासियो द्वारा राजा को केकई का कोप भवन में जाने का सूचना मिलता है राजा दशरथ कोप भवन में जा केकई के कारण पूछते है केकई कहती है देवासुर संग्राम में अपने मुझे दो वर दिया था आज मैं उसी दोनो बार को मांगती हु केकई बोलती है हे राजन आप भारत का राज्याभिषेक व राम को 14 वर्ष के लिये बनवास का मुझे वर दे केकई को दोनों वर राजा द्वारा दे दिया जाता पिता का आदेश मान श्रीराम वन के लिये प्रस्थान करते है श्रीराम के साथ माता सीता व लक्ष्मण भी वन जाते का हठ करते है श्रीराम द्वारा भाई व पत्नी को भी साथ मे वन लेकर चले जाते है।
हो गयी सुनी अयोध्या राम वन को जाने लगे प्रसंग से श्रद्धालुओं के आँखे नम हो गयी।



