नारद मोह एवं रामजन्म का लीला के साथ रामलीला शुरू


म्योरपुर/सोनभद्र{विकास अग्रहरि)
म्योरपुर रामलीला कमेटी के तत्वाधान में 59वा रामलीला मंचन का शुरुवात मुख्य अतिथि मान सिंह एवं जिलापंचायत सदस्य सुषमा सिंह ने सयुक्त रूप से फीता काट कर किया मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि का रामलीला कमेटी ने माल्यार्पण कर एवं अंग वस्त्र भेट कर आये अतिथियों का स्वागत किया अपने संबोधन में विशिष्ट अथिति सुषमा सिंह ने कहा कि रामलीला से हमे सिख लेने की जरूरत है एक

पत्नी कैसी होनी चाहिए भाई कैसा होना चाहिए रामलीला हमे सिख देती है मुख्य अतिथि म्योरपुर ब्लाक प्रमुख मान सिंह गोड ने कहा कि किस प्रकार मर्यादा का पालन करना चाहिये हमे प्रभु श्रीराम के लीला से सिख लेनी चाहिए उन्होंने कहा अधर्म चाहे जितना भी शक्तिशाली क्यो न हो पर सत्य से जीत नही सकता श्री राम ने रामावतार लेकर यही दिखाया रावण जो बहुत बड़ा ग्याता था पर अधर्म के मार्ग पर चलता था एक आम आदमी का अवतार लेकर श्री राम ने उसका वध किया कहा कि एक

भाई,पत्नी,पिता,माता कैसी होनी चाहिए ये हमे रामायण से ज्ञान मिलता है इसी कारण हर वर्ष जगह जगह रामलीला मंचन का आयोजन किया जाता है प्रभु श्रीराम के पदचिन्हों पर चलने की जरूरत है।
मंचन का शरुवात हिमालय की तराई में तपस्या कर रहे नारद जी से शुरू होता है नारद जी का तपस्या से इंद्र का सिंघासन हिल जाता है इंद्र द्वारा कामदेव को बुला कर नारद जी का तपस्या भंग करने के लिये कामदेव को भेजा जाता है कामदेव द्वारा जब नारद जी का तपस्या भंग नही हो पाता तो कामदेव नारद जी से माफी मानते हुए बताते है मुझे इंद्र ने आपकी तपस्या भंग करने को भेजा था यह सुन नारद जी के मन मे अहंकार आ जाता है यह बात नारद जी

भगवान शिव व ब्रम्हा जी को बताने जाते दोनो कहते है ये बात आप किसी को मत बताएगा नारद जी मन मे सोचते है क्यो न मैं इस बात को विष्णु जी से जाकर बताऊ नारद जी विष्णु जी से बता बहुत प्रश्नन हो कर जाते है रास्ते मे एक शील नगर नामक राज्य आता है जहाँ का मनमोहक दृश्य देख नारद जी भावविभोर हो जाते है शील नगर राजा आकर नारद जी का स्वागत कर अपने राज्य महल में ले जाते है जहाँ नारद जी शीलनगर राजा के पुत्री का हस्तरेखा देख भविष्य बताते है नारद जी सोचते है क्यो न मैं ही इस सुंदर कन्या से विवाह कर लूं नारद जी द्वारा विष्णु जी का आवाहन किया जाता है विष्णु जी से नारद जी उनका सुंदर चेहरा मांगते है स्वम्बर में नारद जी जयमाला के

लिये जाते है विश्वसुंदरी विष्णु जी के गले मे माला डालती है यह देख नारद जी अपना चेहरा शीशे में बन्दर का देख विष्णु जी को श्राप दे देते है।
उधर पृथ्वी कहती है मैं राक्षसों का भार नही बर्दाश्त नही कर पा रही हु रसातल में धसती चली जा रही हु पृथ्वी की बातों को सुनने के बाद आकाशवाणी होती है प्रभु का अवतार होने वाला है हे पृथ्वी मत घबराओ उधर राजा दशरथ को पुत्र न होने से चिंतित होते है और अपने गुरु के पास जाते है जहाँ गुरुजनो द्वारा एक यज्ञ किया जाता है यज्ञ के फल स्वरूप राजा को चार पुत्रो की होने की सूचना दासी द्वारा दिया जाता है जिनका नाम राम,लक्ष्मण, भरत,शत्रुघ्न रखा जाता है लीला देख दर्शक भावविभोर हो जाते है।इस दौरान रामलीला कमेटी के माहाप्रबंधक गौरीशंकर सिंह सरपंच, दीपक सिंह, अवधेश सिंह, सुजीत सिंह, प्रधान संघ अध्यक्ष प्रेमचंद यादव,रामलीला कमेटी के अध्यक्ष गणेश जायसवाल , पूर्व कमेटी अध्यक्ष सहदेव तिवारी, बस॑त लाल पासवान, जितेंद्र गुप्ता, क्षेत्र पंचायत सदस्य इरफान अहमद, अभिभावक संघ अध्यक्ष सुजीत अग्रहरि, अमित रावत, कोषाध्यक्ष शुभम सिंह , पंकज सिंह धारी,सत्यपाल सिंह,रामू, अंकित अग्रहरि , अखिलेश अग्रहरि, आनंद तिवारी,प्रकाश व अन्य उपस्थित रहें



