सोनभद्र

जिला संयुक्त चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध करने का फैसला वापस ले सरकार-युवा मंच

मेडिकल कॉलेज के लिए अलग से निर्मित हो अस्पताल
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को ट्वीट कर की अपील
सोनभद्र। युवा मंच प्रदेश संयोजक राजेश सचान ने जिला संयुक्त चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध करने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मेडिकल कॉलेज के लिए बजट आवंटन किया गया है और अस्पताल भी मेडिकल कॉलेज का अभिन्न अंग है तब ऐसे में अस्पताल निर्माण न कर जैसे तैसे मेडिकल कॉलेज संचालित करने से जनपदवासियों को कोई खास लाभ नहीं होगा बल्कि संयुक्त जिला चिकित्सालय के स्वास्थ्य विभाग से मेडिकल कॉलेज को हस्तांतरण से जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत प्रभाव होगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित संयुक्त चिकित्सालय में हर तरह का मुफ्त ईलाज है, जिसमें जांच व दवाएं भी मुफ्त में उपलब्ध हैं जबकि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में पूरी तरह से मुफ्त ईलाज नहीं है। जहां तक नये संयुक्त चिकित्सालय के निर्माण की बात है अभी तक स्पष्ट नहीं है कि कब तक इसका निर्माण होगा। क्योंकि जिले में हाल यह है कि दो प्रमुख औद्योगिक केंद्र रेनकूट व ओबरा में सरकारी अस्पताल नहीं हैं। डिबुलगंज में जो संयुक्त चिकित्सालय 80 के दशक में बनाया गया उसका भी अभी क्षमता से संचालन नहीं हो रहा है। ऐसे में युवा मंच ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को ट्वीट कर इस मामले में सरकार को निर्देशित करने की अपील की है। ट्वीट में कहा गया कि जिला संयुक्त चिकित्सालय का हस्तांतरण स्वास्थ्य विभाग से मेडिकल कॉलेज को न किया जाए और मेडिकल कॉलेज के लिए आवंटित बजट से अलग से अस्पताल का निर्माण किया जाए। ट्वीट में यह भी अवगत कराया गया है कि यहां स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों के जो सृजित पद हैं, उनमें से विशेषज्ञ डॉक्टर के ज्यादातर पद रिक्त पड़े हुए हैं। रिहंद के जहरीला पानी पीने और वायु प्रदूषण से फ्लोरोसिस समेत तमाम लाईलाज बीमारियों की चपेट में हजारों नागरिक हैं। इनके ईलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसलिए सरकार से जनपद में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की मांग की जाती रही है लेकिन इसकी उपेक्षा की वजह से बड़े पैमाने पर लोग बेमौत मरते हैं।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में भारी प्रदूषण है, न सिर्फ इसे रोकने के लिए समुचित व्यवस्था नहीं कर एनजीटी व पर्यावरण मंत्रालय के आदेशों व गाईडलाईन का उल्लंघन आम बात है ही बल्कि संवेदनहीनता इस हद तक है कि इससे प्रभावित लोगों को समुचित स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा से भी वंचित रखा गया हैं जिसका दायित्व सरकार का है।

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