सोनभद्र

दुद्धी में धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम की जयंती

दुद्धी, सोनभद्र। स्थानीय बीआरसी के सभागार में शनिवार को भगवान परशुराम की जयंती समारोह धूमधाम से मनाई गई।जयंती समारोह का शुभारंभ भगवान परशुराम के पूजन अर्चन से हुआ।पंडित शिवपूजन मिश्र ने भगवान परशुराम के चित्र के सामने विधि विधान से पूजा पाठ कराया।मंत्रोच्चार के बीच पूजा पाठ के बाद मुख्य अतिथि रेनुकूट वन प्रभाग के सेवानिवृत्त वनाधिकारी मनमोहन मिश्र व कथावाचक पंडित दिलीप कृष्ण भारद्वाज सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।आयोजक मंडल ने भगवान परशुराम जयंती पर आए सभी अतिथियों को फूल मालाओं तथा अंगवस्त्र और मोमेंटो भेंटकर सम्मानित किया।
परशुराम जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि मनमोहन मिश्र ने कहा कि हमारा समाज मूल शिक्षा से अब धीरे धीरे दूर होता जा रहा है।हमारी संस्कृति एवं सभ्यता सबसे प्राचीन सभ्यता हैं।हमारी संस्कृति की पहचान संस्कृत भाषा से ही है लेकिन आज हाईटेक युग में लोग अंग्रेजी की ओर भाग रहे हैं जिसके कारण अंग्रेजी सभ्यता का हमारे पीढ़ियों पर दिखने लगा है।उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को एक जुट होकर अपनी सभ्यता और संस्कृति को बचाए रखने के लिए संघर्ष जरूरी हो गया है।
कथावाचक पंडित दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि ब्राह्मण कभी सत्तासीन नही रहा।ब्राह्मणों ने हमेशा सत्ता देने का काम किया है।ब्राह्मण वेद शास्त्रों के मध्यम से लोगों को धर्म के प्रति जागरूक करने और उसकी महत्ता को बताने का कार्य करता है।ब्राह्मण का कोई धन नही होता उसका तो भिक्षा मात्र ही धन हैं।
जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलोचन तिवारी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि सर्वे भवन्तु सुखिनः,सर्वे संत निरामयाः श्लोक के माध्यम से बताया कि सभी लोग सुखी रहे और सभी लोग निरोग रहें यही कामना सदैव ब्राह्मण करता है। अन्य वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद में हुआ था मगर उनकी कर्मभूमि और तपोभूमि जौनपुर जिले की सदर तहसील क्षेत्र में आदि गंगा गोमती के पावन तट स्थित जमैथा गांव ही रही। परशुराम के पिता महर्षि यमदग्नि ऋषि का आश्रम आज भी यहां पर है और उन्हीं के नाम पर इस जिले के नाम यमदग्निपुरम् रहा जो कालांतर में जौनपुर के नाम से प्रचलित हो गया।परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था, इस बार अक्षय तृतीया 22 अप्रैल को पड़ी है, इसलिये पूरे देश में इसी दिन उनकी जयन्ती मनायी जा रही है।
इस दौरान पंडित नन्दकिशोर तिवारी, चंद्रकांत त्रिपाठी, रामलोचन तिवारी,कुलभूषण पाण्डेय, सुनील पाण्डेय,विष्णुकांत तिवारी, सदानन्द मिश्रा, जितेन्द्र चौबे, विवेक सांडिल, मदनमोहन तिवारी, दिलीप पाण्डेय,रामानुज दुबे, इंदु भूषण पाण्डेय, राधेश्याम मिश्रा, अरुण पाण्डेय, शशिकांत तिवारी सहित अन्य उपस्थित रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित रामलोचन तिवारी एवं संचालन मनोज मिश्रा ने किया।

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