वनाधिकार कानून के तहत आवंटित हो पट्टा
आईपीएफ ने डीएम के यहाँ पत्रक सौंप की मांग
सोनभद्र। वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों और वनाश्रितों के दावों की सत्यापन प्रक्रिया अति शीघ्र शुरू कर पट्टा आवंटन करने और वन विभाग द्वारा लगाए मुकदमों को वापस लेने की मांग पर आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के प्रतिनिधिमण्डल ने डीएम को संबोधित पत्र एसडीएम हेड क्वार्टर प्रमोद कुमार तिवारी को सौंपा. पत्र में आईपीएफ प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर व जिला प्रवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह शामिल रहे. पत्र में आईपीएफ ने कहा है कि ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट से जुड़ी आदिवासी वनवासी महासभा द्वारा वनाधिकार कानून 2006 के तहत दाखिल किए दावों पर अधिकार के लिए जनहित याचिका दाखिल की गई थी. इस जनहित याचिका में माननीय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने 11 अक्टूबर 2018 को दाखिल दावों पर पुनर्विचार कर अधिकार देने के संबंध में उत्तर प्रदेश शासन को निर्देश दिया था. इसके बाद वनाधिकार कानून के तहत दाखिल दावों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई. लेकिन इसमें अन्य परंपरागत वन निवासियों के दावों का सत्यापन नहीं किया गया और जिन अनुसूचित जनजाति के दावेदारों का सत्यापन किया गया उन्हें भी अभी तक जमीन का आवंटन नहीं किया गया. इस सम्बन्ध में सीएम भी 15 नवम्बर 2022 को बभनी आए थे और घोषणा की गई थी कि अति शीघ्र दावों का निस्तारण करके जमीन आवंटित की जाएगी. परंतु बड़ा खेद का विषय है कि जनपद में वनाधिकार कानून के तहत पट्टा आवंटन और सत्यापन की प्रक्रिया रुकी हुई है. सीएम के कार्यक्रम में प्रशासन द्वारा बांटे गए स्वीकृति पत्र में भी वनाधिकार कानून के फार्म 8 ज के प्रारूप में पट्टे आवंटित नहीं किए गए. इन स्वीकृति पत्रों में न तो गाटा संख्या दर्ज है और न ही रक्बा का उल्लेख है. बांटे गए स्वीकृति पत्र राबर्ट्सगंज, घोरावल और ओबरा तहसील के बेहद कम दावेदारों को दिया गया है. वहीं विधि के विरुद्ध घोरावल के परसौना, उभ्भा व पेढ़ जैसे तमाम गांवों में वनाधिकार कानून के तहत दावा करने वाले आदिवासियों और वनाश्रितों को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने के लिए वन विभाग ने फर्जी मुकदमे कायम कर दिए हैं और उनका उत्पीड़न कर रहा है. ऐसी स्थिति में डीएम से मांग की गई कि दावों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की जाए और पट्टा दिया जाए. साथ ही वन विभाग द्वारा लगाए गए मुकदमें वापस लिए जाएं।



