राबर्ट्सगंज बाजार में जाम पर छिड़ी बहस ई रिक्शा नहीं अतिक्रमण है असली वजह

सोनभद्र (विकास द्विवेदी) नगर पालिका परिषद राबर्ट्सगंज में आए दिन लगने वाले जाम को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर व्यापार मंडल के नेताओं ने बाजार में जाम के लिए ई रिक्शा संचालन को प्रमुख कारण बताते हुए जिला प्रशासन से इनके संचालन के लिए नियमावली बनाने, कलर कोडिंग लागू करने और क्षेत्रवार संचालन तय करने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर अलग राय भी सामने आई है।पूर्वांचल नव निर्माण मंच के नेता गिरीश चन्द्र पाण्डेय ने व्यापार मंडल के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नगर में जाम की असली वजह ई-रिक्शा नहीं, बल्कि दुकानदारों द्वारा सड़क और पटरियों के दोनों किनारों पर किया गया अतिक्रमण है। उन्होंने कहा कि बाजार क्षेत्र में सड़कों के किनारे अस्थायी और स्थायी कब्जों के कारण मार्ग संकरा हो गया है, जिससे आवागमन बाधित होता है और जाम की स्थिति बनती है। गिरीश पाण्डेय ने कहा कि यदि नगर पालिका परिषद क्षेत्र में सड़क और पटरियों पर किए गए अतिक्रमण को हटाया जाए तो बाजार में यातायात काफी हद तक सुचारु हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में ई-रिक्शा शहर और आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए एक सुलभ, सुरक्षित और किफायती परिवहन साधन बन चुका है। कम खर्च में लोग सामान के साथ आसानी से अपने घर तक पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि ई-रिक्शा संचालन के लिए अत्यधिक नियम-कायदे, क्षेत्र निर्धारण और कलर कोडिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू होने से चालकों का शोषण बढ़ सकता है और आम यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। पूर्वांचल नव निर्माण मंच के नेता ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि नगर पालिका क्षेत्र में दुकानदारों द्वारा पटरियों और सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को अभियान चलाकर हटाया जाए। साथ ही, ई-रिक्शा चालकों के लिए सड़क किनारे निर्धारित स्थानों पर दो-दो या चार-चार वाहनों के खड़े होने की व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि यातायात भी सुचारु रहे और आमजन को सुविधा भी मिल सके। नगर में जाम की समस्या को लेकर अब यह बहस तेज हो गई है कि आखिर समाधान ई-रिक्शा पर नियंत्रण है या अतिक्रमण पर कार्रवाई। अब निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।


