हम जगमग करते सबको रहते भले अंधेरे में….
म्योरपुर में अखिल भारतीय अटल काव्य निशा का आयोजन

म्योरपुर/सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
म्योरपुर ब्लॉक के कस्बा स्थित बिरला विद्या इंटर कॉलेज परिसर में बुधवार की रात जनप्रतिनिधियों एवं व्यापार मंच के तत्वावधान में भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए नामचीन कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को देर रात तक हंसाया–गुदगुदाया, वहीं गंभीर सामाजिक, राजनीतिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सोचने को भी मजबूर किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में कवियों का परिचय एवं स्वागत वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यनारायण यादव द्वारा किया गया। सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री जीत सिंह खरवार ने किया। उन्होंने स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व, कृतित्व और आदिवासी जीवनशैली पर प्रकाश डालते हुए उनके विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया। इस अवसर पर उन्हें राजहंस द्वारा ‘एकलव्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता ग्राम प्रधान संगीता गणेश जायसवाल ने की।
कवि सम्मेलन में स्थानीय शिक्षक एवं युवा कवि यथार्थ विष्णु ने सोनभद्र जिले की पीड़ा को शब्दों में ढालते हुए कहा—
“हम जगमग करते हैं सबको, रहते भले अंधेरे में,
नाम हमारा सोनभद्र है, दीपक जैसी हालत है।”
राजस्थान से पधारे सुरेंद्र सार्थक ने अपनी रचना में जीवन संघर्ष को रेखांकित करते हुए कहा—
“खुले आकाश में अपनी कमाई छोड़ देते हैं,
माथा से पेट भरते हैं, मलाई छोड़ देते हैं।”
नागपुर से आए मुकेश मनमौजी ने देश को खोखला करने वाले तत्वों पर करारा प्रहार करते हुए पढ़ा—
“इधर से टूटा है, उधर से फूटा है,
ये हिंदुस्तान है, इसे भ्रष्ट नेताओं ने लूटा है।”
फतेहपुर से आए हास्य कवि समीर शुक्ल ने अपने चिर-परिचित अंदाज में—
“मन की मैल मिटे न पावे, पूजी लियब पंडी पंडा”
सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।

गोरखपुर की कवयित्री डॉ. सत्यमवंदा ने प्रेम रस से ओतप्रोत गीत—
“तेरे जीवन में पहले सी रवानी हो नहीं सकती,
मेरी जैसी कोई तेरी दीवानी हो नहीं सकती”
प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
देश की एकता, अखंडता और कौमी एकता के लिए विख्यात शायर अहमद आज़मी ने—
“ज़मीं मेरी, गगन मेरा, फूलों का चमन मेरा,
जहां सब मिलकर रहते हैं, वही वतन मेरा”
सुनाकर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
स्थानीय भाषाओं और आदिवासी जीवन पर अपनी विशेष पकड़ के लिए मशहूर लखन राम जंगली ने आदिवासियों की स्थिति को रेखांकित करते हुए प्रभावशाली प्रस्तुति दी। वहीं प्रद्युम्न त्रिपाठी ने आपसी भाईचारे पर जोर देते हुए कहा—
“रहे मिलजुल करके, सभी आदमी बनकर।”
कार्यक्रम का सफल संचालन कमलेश राजहंस ने किया। उन्होंने अपने व्यंग्य—
“छोटे चोर धुरमा जेल में, और बड़े चोर जेल का उद्घाटन करते हैं”
से श्रोताओं को ठहाकों में डुबो दिया।
इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी दिनेश मिश्र, जगत नारायण विश्वकर्मा, प्रेमचंद यादव, दीपक सिंह, ओंकारनाथ पांडेय, रविकांत, अजय आग्रही, सुनील अग्रहरि, कुलदीप सिंह, वकील अहमद, पंकज सिंह सहित सैकड़ों साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन ने म्योरपुर को साहित्य और संस्कृति के रंग में सराबोर कर दिया।


